वैद्युत पृथक्करण

किसी वैद्युत प्रणाली के दो या अधिक प्रभागों को इस प्रकार विलगित करना कि उनके बीच में आवेश-वाहक कणों का प्रवाह नहीं (बहुत कम) हो, वैद्युत पृथक्करण (Galvanic isolation) कहलाता है। पृथकृत प्रभागों के बीच विद्युत पृथक्करण के होते हुए भी ऊर्जा या सूचना का विनिमय सम्भव है जो धारिता, प्रेरण, विद्युतचुंबकीय तरंगों, श्रव्य तरंगों या यांत्रिक विधियों से किया जाता है।

ट्रांसफॉर्मर की प्राइमरी और सेकेण्डरी वाइंडिंग विद्युत की दृष्टि से परस्पर पृथक्कृत होती हैं; इनमें विद्युत ऊर्जा का हस्तान्तरण चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा होता है।
प्रकाशीय पृथक्करण

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