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शाह आयोग' भारत सरकार द्वारा २८ मई १९७७ में नियुक्त एक जाँच आयोग था। यह आपातकाल (१९७५-७७) के समय की गयी ज्यादतियों की जाँच के लिये बनाया गया था। भारत के भूतपूर्व मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति जे सी शाह इसके अध्यक्ष थे।

शाह आयोग ने सौ बैठकें की थीं, 48,000 कागजात की पड़ताल की थी और दो अंतरिम रिपोर्ट पेश की थीं। पहली अन्तरिम रपट ११ मार्च १९७८ को सौंपी गयी थी। अन्तिम रपट ६ अगस्त १९७८ को प्रस्तुत की गयी।

अनुक्रम

सन्दर्भसंपादित करें

26 जून 1975 को देश में लगे आपातकाल की जांच के लिए बने शाह आयोग की रिपोर्ट ऑस्ट्रेलिया से भारत लाई जाएगी। हाल ही में दिल्ली में हुई मीसाबंदियों के लोकतंत्र सेनानी संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव पारित हुआ। 26 जून 2014 को बने संघ के वेब पोर्टल डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.आपातकाल.कॉम ने पाया कि आपातकाल की जांच के लिए बने शाह आयोग की रिपोर्ट की प्रतियां पुन: सत्ता में आई इंदिरा सरकार द्वारा नष्ट कर दी गई थी। लेकिन एक प्रति ऑस्ट्रेलिया की लाइब्ररी में मौजूद है। यह रिपोर्ट आपातकाल के दौरान हुई बर्बरता के कई राज खोलेंगी।संपादित करें

लोकतंत्र सेनानी संघ मीसाबंदियों का संगठन है। दिल्ली में हुई लोकतंत्र सेनानी संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में रिपोर्ट भारत लाने का प्रस्ताव पारित हुआ है। आपातकाल डाॅटकाॅम के प्रधान संपादक नरेंद्र अग्रवाल (खंडवा) ने लोकतंत्र सेनानी संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में यह मुद्दा रखा था। कार्यकारिणी की बैठक दिल्ली में गुरुवार को हुई।संपादित करें

पर इसमें आपातकाल डाॅटकाॅम वेबसाइट के श्री अग्रवाल ने आपातकाल का सच जानने के लिए शाह आयोग की रिपोर्ट ऑस्ट्रेलिया से मंगाए जाने का आग्रह किया। बैठक में रिपोर्ट मंगाए जाने पर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया। फैसला किया कि प्रधानमंत्री और विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर आपातकाल पर बने शाह जांच आयोग की रिपोर्ट मंगाने का आग्रह किया जाए। बैठक में राज्यसभा सदस्य मेघराज जैन, केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली, पूर्व मंत्री सत्यनारायण जटिया, राव उदयप्रताप सिंह, इंद्रेशजी, प्रभात झा, केंद्रीय मंत्री नरेंद्रसिंह तोमर मौजूद थे।संपादित करें