इस्लाम में, शिर्क (अरबी: شرك širk) मूर्तिपूजा या बहुदेववाद का पाप है (अर्थात, अल्लाह के अलावा किसी भी चीज़ या किसी चीज़ का उपासना या पूजा)। इसका अर्थ है, अल्लाह के आराधना में अर किसी को साझेदार बनाना। इसे तौहीद (एकेश्वरवाद) कहा जाता है। मुश्रिक (مشرك) (बहुवचन: مشركون) वो हैं जो शिर्क का अभ्यास करते हैं, जिसका शाब्दिक अर्थ है "संगति" और इसका अर्थ है अल्लाह या एकक भगवान के साथ अन्य देवताओं और ईश्वरों को स्वीकार करना (ईश्वर के सहयोगी के रूप में)।

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