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शिलप्पादिकारम (तमिल : சிலப்பதிகாரம்/शिलप्पादिकारम् ; अर्थ - 'पायल की कथा') तमिल साहित्य के पाँच श्रेष्ठ महाकाव्यों में से एक है। इसे तमिल राष्ट्रीय काव्य माना गया हैं। कोच्चि निवासी एक जैन धर्म कविराजकुमार इसके रचयिता माने जाते हैं। इनका छद्म नाम 'इलांगो अडिगल' है। वे चेर राजवंश के राजा वेल केलु कुट्टवन के भ्राता थे।

इस ग्रंथ में कण्णगी पूजा (पत्नी पूजा ) का उल्लेख मिलता है।यहीं से उस समाज का मात़ृसत्तात्मक व्यवस्था से पितृसत्तात्मक व्यवस्था की ओर परिवर्तित होने का संकेत मिलता है।

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