बिरसिंहपुर जो "'''गैवीनाथ धाम'''" नाम से उल्लेखित है। यह शिवधाम जिला सतना में है़। बिरसिंहपुर जो किसतना शहर से 35 किलोमीटर की दूरी पर है। गैवीनाथ मंदिर भगवान शिव के शिवलिंग अवतार के लिए उल्लेखित है। बिरसिंहपुर एक कस्बा है। इस छोटे से नगर को गैवीनाथ मंदिर और भी खास बनाता है। गैवीनाथ शिवलिंग को महाकाल शिवलिंग उज्जैन का दूसरा रूप माना जाता है। भक्तों की श्रद्धा इसे महाकाल शिवलिंग जितना फलदायी मानती है। पुरानी मान्यताओं की माने तो चारों धाम की यात्रा के बाद इस मंदिर में चारो धाम से लाया गया जल चढ़ाया जाता है तभी यात्रा का फल मिलता है। अगर मध्यप्रदेश आए तो यहाँ जरूर आएं। गैवीनाथ शिवलिंग का इतिहास बहुत पुराना है मंदिर के अस्तित्व के पूर्व एक "गैवी" नाम की वृद्धा यहां निवास करती थी और ये समूचा इलाका एक जंगल के रुप मे तच्छक एवं खतरनाक जानवरों से भरा था। गैवी अपनी दिनचर्या के हिसाब से चूल्हे में रोटी पकाया करती थी तभी अकस्मात एक पत्थर जमीन से बाहर आ गया परंतु वृद्धा को इसका आभास नहीं हुआ और वो प्रतिदिन उसे किसी माध्यम से जमीन में दबा दिया करती वह भगवान के इस अवतार से बिल्कुल भी परिचित नही थी परन्तु जब गाँव के लोगों को इसकी जानकारी हुई तो उस प्रस्तर प्रतिमा को स्थापित कर उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण यहां के राजा वीरसिंह द्वारा कराया गया। और उस वृद्धा के नाम पर इस शिवधाम का नाम "गैवीनाथ धाम'रखा गया। एक बार मुगल साम्राज्य के क्रूर शासक औरंगजेब को इस स्थान की प्रसिद्धि के बारे में ज्ञात हुआ तो वह अपनी सेना लेकर शिवधाम आया और अपनी धारदार तलवार से उसने जैसे ही शिवलिंग पर चोट मारी तो उस लिंग के मध्य से खून बहने लगा फिर एक वार में शिवलिंग के एक किनारे से ढेर सारी मधुमक्खी और बर्र उड़ने लगे तत्पश्चात अंतिम प्रहार से एक भुजंग सर्प प्रकट हुआ और औरंगजेब गिरते पड़ते वहाँ से भागा बाद में उसे अपनी गलती का आभास हुआ। भगवान शिव के अनोखे धाम में वर्षभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है और पूर्णिमा, बसंत पंचमी एवं महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर यहां खड़े होने तक कि जगह नही मिलती । श्रावण मास में सारे तीर्थों का जल चढ़ाने भगवान भोलेनाथ के भक्त इस पवित्र नगरी में भगवान गैवीनाथ का आशीर्वाद लेने आते है।

ॐ नमः शिवाय। Edited By Pradeep Kesharwani Care Of Bhagwan Shiv.