भाषाविज्ञान के सन्दर्भ में संरचनात्मक भाषाविज्ञान (Structural linguistics) या संरचनात्मक विधान (structuralism), से आश्य उन सम्प्रदायों या सिद्धान्तों से है जिनमें भाषा को स्व-गठित (self-contained), और स्वनियंत्रित तंत्र माना जाता है। इस विषय पर सिटजरलैण्ड के भाषाशास्त्री फर्डिनान्ड डी सौसुरे (Ferdinand de Saussure) का कार्य महत्वपूर्ण है। उनका यह कार्य उनके मरणोपरान्त सन १९१६ में प्रकाशित हुआ