सआदत अली खान प्रथम

१८वे सदी का एक भारतीय रईस

मुग़ल सल्तनत के अधीन ही 1712 मेंअवध के सूबेदार के पद पे बैठाये गए थे एक निडर ,कर्मठ व साहसी व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति को जिनका पूरा नाम सआदत खां बुरहान-उल-मुल्क यानी कि सआदत खां प्रथम । अवध को एक स्वायत्त राज्य बनाने का श्रेय इन्ही को जाता है ।इनका जन्म 1680 में व मृत्यु 1739 में हुई। ये अवध के शाषक के पद पर सन 1732 से लेकर 19 मार्च 1739 तक आसीन रहे । उनका शाषन काल बहुत सारे मायने में एक सुंदर काल प्रतीत होता है हालांकि जब 1712 में उन्हें अवध का सूबेदार नियुक्त किया गया था तो अवध में अनेकों विरोध के स्वर गूंजने लगे थे जिनसे उन्हें अनेक वर्षो तक लड़ना पड़ा था । सआदत खां ने अवध के संसाधनों को बढ़ाने के लिए काफी सुधार भी किये थे ।उन्होंने अपने राज्य में भ्रस्टाचार पे जबरदस्त अंकुश लगाया था ।मुग़ल के सूबेदार बनाये जाने के तुरंत बाद से ही उन्होंने उनके खिलाफ जाने शुरू कर दिए थे ,उन्होंने अवध के सूबेदार के पद पर रहते हुए अनेको जमींदारों को लुभावने सुविधाओं के लालच देकर उन्हें अपने राज्य में मिला लिया था । उन्होंने कभी भी किसी धर्म विशेष में कोई भेद भाव नही किया ।उन्होंने अनेको उच्च पदों पे हिन्दू अधिकारियों को नियुक्त कर रखा था । और जब भी उनके शाषन काल मे किसी जमींदार या सामंत ने विद्रोह करने की कोशिश की तो उन्हें भी बिना किसी धर्म सम्प्रदाय का ख्याल किये बिना मजबूती से दबाया ।सआदत खां ने 1723 में नया राजस्व बंदोबस्ती को लागू किया था,इनके इस कदम से उस समय बड़े जमींदारों के कर्ज जाल में फसे किसानों को बड़ी राहत मिली थी। 1739 में उनके मरने के बाद उनका भतीजा सफदर जंग (अबु-अल-मंसूर मोहम्मद मोकीन खाँ ) उनके पद पे आसीन हुए ।