सत को मानने वाले सतनामी कहलाते है। सतनामी गुरु घासीदास जी के सतनाम विचारधारा के अनुयायी है।


शिव कामले जी के अनुसार:- अतीत में हिंदू वर्ण व्यवस्था में सतनामी समाज के साथ अष्प्रिष्यता का भाव सनातन संस्कृति और वर्ण व्यवस्था के अमानवीय व्यवहार और असमान व्यवस्था के विरुद्ध विद्रोह का ...सामाजिक बहिष्कार की परिणति थी न कि पेशागत कार्य और न वर्णिक व्यवस्था के अधीन निम्नतर जाति का होना!...और मूर्ख जातियाँ उस परम्परा का निर्वहन यदा कदा आज भी करते मिल जाते हैं !!