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-- नया सदस्य सन्देश (वार्ता) 06:58, 3 जनवरी 2021 (UTC)यूपीएससी आईएएस एक्जाम और एसएससी की परीक्षा में अंतर

अगर एसएससी में क्वेश्चन आता है जिंदा हो तो उत्तर होगा हां जिंदा हैं इतना ही काफी है और पूरे अंक मिल जायेंगे

लेकिन यह क्वेश्चन यूपीएससी सिविल परीक्षा में आता है तो उत्तर हां में ही होगा लेकिन कुछ प्रोसेस के बाद उत्तर हां में आएगा

इसी के साथ यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा का उत्तर लिखना शुरू करते हैं

मानव भगवान की सबसे बड़ी कृति है भगवान ने मानव को संपूर्ण जैव जगत का अर्थात संपूर्ण ब्रह्मांड का ख्याल रखने के उद्देश्य से पैदा किया

मानव ने अपने स्वार्थ से वसीभूत होकर अपने आर्थिक विकास के लिए संपूर्ण जैव जगत पर कब्जा करना चाहा और अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए उसने पेड़ों और जंगलों को काटना शुरू कर दिया इससे प्रकृति का संतुलन बिगड़ता गया और पर्यावरण बदलाव जैसी समस्या पैदा हो गई

पर्यावरण बदलाव से बारिश कम होने लगी जिसके कारण फसल चक्र प्रभावित हुआ और खाद्य सुरक्षा प्रभावित हुई जिसके कारण मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा

पर्यावरण बदलाव से पानी की किल्लत हुई और पानी की पूर्ति के लिए मानव ने आंतरिक स्रोतों के पानी का दोहन शुरू कर दिया जिसके कारण आंतरिक स्रोतों का पानी भी कम होता गया और जल संकट जैसी समस्या पैदा हुई

आर्थिक विकास के लिए पेड़ और जंगलों की कटाई होने से वन्य जीवों के आवास समाप्त होने लगे और भोजन और आवास के अभाव में वन्य जीव मरने लगे जिससे जैव विविधता कम होने लगी और कुछ वन्य जीव भोजन और आवास की तलाश में मानव बस्तियों में प्रवेश करने लगे जिससे मानव और वन्य जीवों में संघर्ष होने लगा

इधर वृक्षों को काटकर कोयले के रूप में कल कारखानों में उपयोग किया जाने लगा और कल कारखानों से निकलने वाले प्रदूषित धुएं से मानव स्वास्थ्य प्रभावित होने लगा जिससे कैंसर तपेदिक बुखार और एड्स जैसे रोगों से मानव प्रभावित हुआ

कहने को तो मानव ने अपने आर्थिक विकास के लिए प्रकृति के संसाधनों का अविवेक रूप से दोहन किया था मगर यह आर्थिक विकास ही मानव के पतन का कारण बन गया अगर इस पतन से बचना है तो अपने विकास के साथ प्रकृति का भी ध्यान रखना होगा अर्थात संसाधनों का उचित उपभोग और प्रबंधन करना होगा

उपरोक्त के आधार पर कह सकते हैं कि जिंदा तो हैं लेकिन प्रकृति का जो संतुलन बिगाड़ा है जिसके कारण संपूर्ण मानव जगत और जैव विविधता का ह्रास हुआ है अगर इस अविवेकपूर्ण संसाधन दोहन पर रोक ना लगाई तो ये आर्थिक विकास ही एक दिन मानव सभ्यता के अंत का कारण बन जाएगा

Never never never give upसंपादित करें

जब वह पैदा हुआ तो उसकी मां ने उसे देख कर मुंह फेर लिया क्योंकि ना सिर्फ वह दोनों हाथों, पांव से महरूम था बल्कि सिरे से उसकी टांगे और बाजू मौजूद ही नहीं थी

इस वक्तवक़्त उसकी उम्र 37 साल है सोचिए उसने पिछले 37 बरस बगैर टांगों, बाजुओं और हाथों पांव के कैसे गुजारे होंगे... ? और वह आज किस हालत में होगा ??

अगर आप ऑस्ट्रेलिया में पैदा होने वाले इस शख्स की जिंदगी को पढ़ें तो आपके सारे गिले-शिकवे तमाम बहाने सब शिकायतें हवा में गायब हो जाएंगी और मेरी तरह आपका सर भी शर्म से झुक जाएगा

क्योंकि वह अपने आधे अधूरे जिस्म के बावजूद एक मुकम्मल और भरपूर जिंदगी जी रहा बल्कि करोड़ों बुझी आंखों में उम्मीद की रोशनी और मायूस दिलों में जोश की आग भड़का रहा है

यह सात किताबों का राइटर है और इसकी अक्सर किताबें न्यून्यूयॉर्क बेस्ट सेलर की लिस्ट का हिस्सा बनी है

इसकी किताबों के मक़बूलियत का अंदाजा इस बात से लगाइए कि यह किताबें दुनिया की 40 से ज्यादा जुबानों में तर्जुमा हो चुकी हैं

वह एक मोटिवेशनल स्पीकर भी है और TED समेत हर काबिले जिक्र फोरम पर अपनी गुफ़्तगू के जरिए लाखों लोगों की जिंदगियां बदल चुका है

उसके मुंह से निकलने वाला हर लफ़्ज़ उम्मीद और जिंदगी से भरपूर होता है अपनी मोटिवेशनल स्पीच के सिलसिले में वह आधी से ज्यादा दुनिया घूम चुका है

उसने 2005 में Life without limbs और 2007 में "Altitude is Altitude" के नाम से ट्रेनिंग के इदारे (सेंटर)बनाए जहां वह बिजनेसमैन अफरादों और दुनिया की मुख्तलिफ (विभिन्न) हुकुमतों के अहलकारो को कामयाबी के गुर सिखाता है

उसका मीडिया से भी गहरा ताल्लुक है हर बड़ी मीडिया हाउस और सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर उसके लाखों फॉलोअर्स हैं जिन्हें वह अपनी स्पीच, वीडियोस, और तहरीरों के जरिए बेहतर और खुशहाल जिंदगी जीने की तरगी़ब देता रहता है

CNN BBC CNBC समेत दुनिया भर के इंटरनेशनल लेवल के टीवी चैनल्स उसके इंटरव्यूज अपने दर्शकों तक पहुंचाते रहते हैं

उसने मोहब्बत भी की और शादी भी.... उसकी बीवी खूबसूरत ऑस्ट्रेलियन मॉडल है इन दोनों के चार हंसते खेलते खूबसूरत बच्चे हैं यह अपनी खूबसूरत बीवी और बच्चों के साथ कैलिफोर्निया अमेरिका में अपने आलीशान घर में अपनी मनपसंद जिंदगी जी रहा है

इस शख्स का नाम Nick vujicic है

जब आप अपने पूरे जिस्म के साथ अपनी अधूरी जिंदगी से तंग आने लगे तो इस पोस्ट को तीन बार पढ़ लिया करें

इसके अधूरे जिस्म के साथ "पूरी" जिंदगी आपको जीने का हुनर और हौसला अता करेगी.... Pratap Singh alwar (वार्ता) 15:16, 23 जनवरी 2021 (UTC)

Humanसंपादित करें

मनुष्य के सत्कार्य ही उसके जीवन की सफलता के सार होते है। मानव के चरित्र में अनेक विकृतियां स्वयंकृत अथवा समाज के प्रदूषण से उत्पन्न होती है। मानव यदि विकृतियों से बचा रहता है तभी वह सफलता एवं सुख का अनुभव कर पाएगा। व्यक्ति की किसी भी वस्तु के प्रति आसक्ति उस वस्तु को प्राप्त करने की लालसा उत्पन्न करती है और वह क्रियाशील हो जाता है। मनुष्य का आत्मसंयमित होना आवश्यक है अन्यथा उसे अनेक बुराइयां दबा लेंगी और वह असफलता के दलदल में धंस जाएगा। यदि संयम के साथ क्रियाशील रहेगा तो आत्मविश्वास सबल रहेगा और उत्साह के साथ अपने कर्म में सफलता प्राप्त कर सकेगा। उत्साह जहां संयमशीलता से किए कर्म के साथ होता है वहीं इसके विपरीत उत्तेजना होती है। उत्तेजना में उत्साह जैसा जोश तो होता है, पर वह क्षणिक उद्वेग पर आधारित होता है। उत्साह सकारात्मक होने के कारण कार्य के प्रति आशा का संचार करता है, जबकि उत्तेजना पैदा होने पर नकारात्मक वृत्तियां बढ़ने लगती है और कार्य की असफलता की ओर बढ़त होने लगती है। उत्साह कार्मिक क्षमता का विकास होता है, जबकि नकारात्मक सोच क्रोध को जन्म देती है। हमारे मन एवं उसकी वृत्तियों का शरीर बुद्धि व आत्मा पर प्रभाव पड़ता है। Pratap Singh alwar (वार्ता) 15:17, 23 जनवरी 2021 (UTC)