सन्त धरमदास (15वीं-16वीं शती) मगही के मध्यकालीन संत कवि हैं। ये कबीर के समकालीन थे जो कबीर के साथ मगध क्षेत्र में आए थे। मगध में रहते हुए उन्होंने मगही बोली में रचनाएँ की और धर्मोपदेश संबंधी गीतों का सृजन किया। इनकी रचनाएँ यदा-कदा साधु-संतों के बीच सुनी जाती रही है। धरमदास की ‘धरमदास शब्दावली’ नामक रचना बेल ग्रेडियर प्रेस, प्रयाग से 1923 में प्रकाशित हुई है।