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सपत्नी या सौतन ये बहुविवाह में पत्नीयों के मध्य का सम्बन्ध है। जब किसी एक पुरुष से एक से अधिक नारीयाँ विवाह करे, तो वें नारीयाँ एक दूसरे की सपत्नी होती हैं।

वेद में उल्लेखसंपादित करें

मैत्रेयीसंहिता में मनु की दस स्त्रियों के प्रमाण मिलते हैं।[1] ऋग्वद में एक सम्पूर्ण सूक्त सपत्नी के सन्दर्भ में उल्लिखित है।[2] यद्यपि एक पत्नीव्रत को आदर्श विवाह माना जाता था, परन्तु वेदों में भी बहुवपत्नीत्व प्रथा यत्र तत्र प्राप्त होती हैं।[3]

उद्धरणसंपादित करें

  1. मैत्रेयीसंहिता १/५/८/
  2. ऋग्वेदसंहिता - १०/१४५/१-६
  3. ऋग्वेदसंहिता - १/६२/११, १/१०४/३, १/१०५/८, १/१८६/७