समालोचनात्मक सिद्धांत (critical theory) वह वैचारिक सम्प्रदाय है जिसमें समाज शास्त्र और मानविकी के अध्ययन से प्राप्त ज्ञान से समाजसंस्कृति की आलोचनात्मक समीक्षा और मूल्यांकन किया जाता है। २०वीं शताब्दी के दार्शनशास्त्री मैक्स होर्कहाइमर के अनुसार "समालोचनात्मक सिद्धांत का ध्येय मानव को उसकी परिस्थितियों से मुक्त करने की चेष्टा है जिसमें वह अपने आप को फंसा हुआ पाता है"।[1] समालोचनात्मक सिद्धांत की विचारधारा से जुड़े समाजशास्त्रियों को अक्सर मार्क्सवादी समझा जाता है हालांकि वे मार्क्सवाद के कुछ तत्वों से भिन्न मत रखते हैं और यह समझते हैं कि विचारधाराओं की प्रति आस्था रखना ही मानव-अमुक्ति का मुख्य कारण है।[2][3]

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. Horkheimer 1982, p. 244.
  2. [Geuss, R. The Idea of a Critical Theory, Cambridge, Cambridge University Press]
  3. See, e.g., Leszek Kołakowski's Main Currents of Marxism (1979), vol. 3 chapter X; W. W. Norton & Company, ISBN 0393329437