सरदार बज्जर सिंह राठौड

सिक्खो के दसवे गुरू श्री गोविंद सिंह जी के गुरू

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पारिवारिक पृष्टभूमिसंपादित करें

बज्जर सिंह जी सूर्यवंशी राठौड राजपूत वंश के शासक वर्ग से संबंध रखते थे। वो मारवाड के राठौड़ राजवंश के वंशज थे |

वंशावली

राव सीहा जी

राव अस्थान

राव दुहड

राव रायपाल

राव कान्हापाल

राव जलांसी

राव चंदा

राव टीडा

राव सल्खो

राव वीरम देव

राव चंदा

राव रीढमल

राव जोधा

राव लाखा

राव जोना

राव रामसिंह प्रथम

राव साल्हा

राव नत्थू

राव उडा

राव मंदन

राव सुखराज

राव रामसिंह द्वितीय

सरदार बज्जर सिंह (अपने वंश मे सरदार की उपाधि लिखने वाले प्रथम व्यक्ति)

इनकी पुत्री भीका देवी का विवाह आलम सिंह चौहान (नचणा) से हुआ जिन्होंने गुरू गोविंद सिंह जी के पुत्रो को शस्त्र विधा सिखाई।[1][2] 1710 ई° के चॉपरचिरी के युद्ध में इन्होंने भी बुजुर्ग अवस्था में बन्दा सिंह बहादुर के साथ मिलकर वजीर खान के विरुद्ध युद्ध किया और अपने प्राणों की आहुति दे दी।

सन्दर्भसंपादित करें

  1. Bhalla, Sarup Das, Mahima Prakash. PATIALA, 1971
  2. Kuir Singh, GurbiJas Patshahi 10. Patiala, 1968
  1. https://www.sikhiwiki.org/index.php/Alam_Singh_Nachna - Alam Singh Nachna
  2. https://sikhbookclub.com/Book/Bachitar-Natak - Bachitra Natak By Guru Gobind Singh Ji
  3. https://everipedia.org/wiki/lang_en/Sardar_Bajjar_Singh_Rathore/amp - Everipedia's Article On Bajjad Singh Rathore