सरयूपारीण ब्राह्मण या सरवरिया ब्राह्मण या सरयूपारी ब्राह्मण सरयू नदी के पूर्वी तरफ बसे हुए ब्राह्मणों को कहा जाता है। ऋग्वेद में मुख्य रूप से तीन नदियों का उल्लेख ही है। इनमे सरस्वती, सिंधु और सरयू नदी का ज़िक्र है। ये शुद्ध आर्यवंशी षट्कर्मा वेदपाठी आदिकालिक समूह है जो की आदिकाल से ही ब्राह्मण धर्म का अधिष्ठाता रहा है।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

ऐसा माना जाता है कि राजा दशरथ के घर श्राद्ध कर्म में भोजन के लिए ब्राह्मणों को बुलाया गया था तो ब्राह्मणों ने भोजन करने से मना कर दिया जिस कारण उन्हें देश से निकल जाने का आदेश दिया गया । तब ब्राह्मण सरयू नदी पार कर पूरब दिशा की ओर चल दिये । कालांतर में उन्हें सरयूपारी ब्राह्मण कहा गया