1919 में सहसंयोजक आबंध का नामकरण लैंगम्यूर ने किया था

संयोजी बंधन का आरंभिक सिद्धान्त
H2 का अणु सहसंयोजी बंधन द्वारा बनता है। इसमें दो हाइड्रोजन परमाणु दो एलेक्ट्रानों का साझा करते हैं।

सहसंयोजी आबंध (covalent bond) वह रासायनिक आबंध है जिसमें परमाणुओं के बीच एलेक्ट्रान-युग्मों का सहभाजन (sharing) होता है। सहसंयोजी आबंधन में अनेक प्रकार की पारस्परिक क्रियाएँ (interaction) होते हैं जिनमें से σ-आबन्धन, π-आबन्धन, धातु-धातु आबन्धन आदि प्रमुख हैं।

जब दो परमाणुओं की विधुत ऋणात्मकता के बीच का अंतर शून्य के बराबर होता है तब परमाणुओं के बीच सहसंयोजी बंध अथवा आणविक बंध का निर्माण होता है