आपसी मत भिन्नता को सम्मान देने के बजाय विरोधाभास का उत्पन्न होना, अथवा ऐसी परिस्थितियों का उत्पन्न होना जिससे व्यक्ति किसी अन्य धर्म के विरोध में अपना व्यक्तव्य प्रस्तुत करे, साम्प्रदायिकता कहलाता है। जब एक विशेष सम्प्रदाय के मानने वालों के भौतिक हित दूसरे सम्प्रदाय के सांसारिक हितों से टकराते हैं, तो सम्प्रदायिकता का उदय होता है। यह एक उग्र विचारधारा है जिसमें दूसरे सम्प्रदाय के मानने वाले को शत्रु और विरोधी मान लिया जाता है। इसमें किसी विशेष सम्प्रदाय के अनुयायी दूसरे सम्प्रदाय के अनुयायी को अपने विकास में बाधक मानता है।