मार्क्सवादी दर्शन में सांस्कृतिक प्राधान्य या सांस्कृतिक वर्चस्व (cultural hegemony) से आशय उस स्थिति से है जब सांस्कृतिक रूप से विविधता वाले किसी समाज में सत्ताधारी वर्ग का वर्चस्व हो। सत्ताधारी वर्ग, समाज के विश्वासों, व्याख्याओं, मूल्यों आदि का उपयोग इस तरह करता है कि सत्ताधारी वर्ग की वैश्विक दृष्टि उस समाज की स्वीकृत विश्वदृष्टि बन जाय।

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें