सामान्य वर्ग को आरक्षण

गरीबी देखकर आरक्षण क्यों नहीं

भारत में आरक्षण काफी लंबे समय से चला आ रहा है. यह आरक्षण वर्ग के अनुसार लागू किया गया है. और इन वर्गों में कुछ निश्चित जातियों को शामिल करके आरक्षण का लाभ दिया जाता है.

Reservations for the general category
सामान्य वर्ग में आने वाले इन धर्मों के लोग नवीनतम लागू हुए 10% आरक्षण का लाभ प्राप्त कर पाएंगे.

भारत की जनसंख्या को चार वर्गों में बांटा गया हैसंपादित करें

  • सामान्य वर्ग
  • ओबीसी
  • एससी
  • एसटी

इनमें से ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग को आरक्षण मिल रहा था. परंतु सामान्य वर्ग में किसी को भी आरक्षण नहीं दिया जा रहा था. इसके साथ ही सामान्य वर्ग में हिंदुओं की संख्या से ज्यादा मुस्लिमों की संख्या आती है और फिर ईसाई.

सामान्य वर्ग को 10% आरक्षणसंपादित करें

सरकार ने जनवरी 2019 को लोकसभा में संविधान संशोधन बिल [1] लाकर सवर्णों के लिए भी 10% आरक्षण प्रदान कर दिया है. लेकिन यह आरक्षण आर्थिक आधार पर दिया जा रहा है. सामान्य वर्ग में आने वाले सभी धर्मों के लोगों को उनकी आर्थिक स्थिति के आधार पर ही आरक्षण का लाभ प्राप्त होगा. यदि सामान्य वर्ग का व्यक्ति सालाना 8 लाख से कम आय प्राप्त करता है तो वह इसके योग्य माना जाएगा. ये आरक्षण केवल आर्थिक रूप से कमजोर लोगो को ही मिलेगा.

सुब्रमण्यम स्वामी : ओबीसी को आरक्षणसंपादित करें

भारतीय जनता पार्टी के सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा नेतृत्व की जा रही जनता पार्टी ने 1971 में मंडल कमीशन बनाकर ओबीसी के लिए भी आरक्षण लाया था तो उसमें भी आर्थिक स्थिती को आधार बनाया था, OBC पर वही नियम अब भी लागूू हैै। परंतु एससी और एसटी वर्ग के जनजातियों को बिना किसी शर्त के आरक्षण का लाभ दिया जाता है. इसमें भी सभी धर्मों के लोगों को आरक्षण का लाभ मिलता है. एससी एसटी को दिए जाने वाले आरक्षण के नियम लोगो को सही नहीं लगते क्यूंकि आर्थिक रूप से काफी मजबूत लोग भी इस इस एससी एसटी आरक्षण का लाभ उठाते हैं, क्यूंकि ये आरक्षण एससी एसटी में आने वाले सभी धर्मो और जातियों को दिया जाता है भले ही वह अमीर या व्यापारी हों.