सिन्दरली राजस्थान के पाली जिले का एक गाँव है। सिंदरली स्थानीय भाषा में 'हिंदरली' के रूप में जाना जाता है। यह मेड़तिया राठोडों का ठिकाना है।

स्थितिसंपादित करें

"निर्देशांक" - 25 ° 14 '53 "N, 73 ° 24' 53" E[1] सिन्दरली नाडोल से 16 किमी, सादड़ी कस्बे से लगभग 9 किमी, पाली से ७० किमी, तहसील देसूरी कार्यालय से २३ किमी दूर है।

जनसंख्यासंपादित करें

यह मेड़तियों का ठिकाना है। यहाँ घरो कि संख्या ४२४ है और आबादी लगभग 1,८६० लोगों की आबादी है। यहाँ राजपूत, राजपुरोहित, जणवा, लोहार, राव, देवासी, मेघवाल, गुरु, ढोली, रावणा राजपूत, भील आदि जातियाँ निवास करती है।

इतिहाससंपादित करें

सिन्दरली का इतिहास ५०० साल पुराना है। यह मारवाड़ राज्य का एक ठिकाना है और यह घाणेराव ठाकुर गोपीनाथ जी के पुत्र हिम्मत सिंहजी को बंट में प्राप्त हुआ। तब से लेकर आज तक यह मेड़तिया के शासन में रहा है। यहाँ एक गढ़ भी है १७०४ से पहले घाणेराव ठिकाना के अंतर्गत था और सारा राजस्व घाणेराव को जाता था व १७०४ के बाद रावला को जाता रहा है।

राजनीतिसंपादित करें

वर्तमान सिन्दरली पंचायत के सरपंच कानाराम जी मेघवाल है और उप सरपंच जगदीश सिंह जी राजपुरोहित है

तहसील, जिला और राजस्थान की राजनीति में सिन्दरली का काफी योगदान रहा है। मेड़तिया नाथू सिंह जी राठौड़ यहाँ से देसूरी तहसील के प्रधान चुने गए। वही मूल रूप से सिंदरली के मेड़तिया सज्जन सिंह् जी राठौड़ सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र (राजस्थान) से १९७२ में विधायक चुने गए। सज्जन सिंह १९६० से देवली में रहते हैं। वही वर्त्तमान राजनीति में मनोहर सिंह राठौड़, ठाकुर कारण सिंह, गुलाब चौधरी, रमेश पुरोहित, महेंद्र सिंह राजपुरोहित, रमा बाई मेघवाल आदि सक्रिय हैं। यहाँ ग्राम पंचायत में ४ गाव आते है- सिंदरली, मांगलिया गुड़ा, पाटिया गुड़ा, वारा सोलंकियां।[2]

प्रसिद्ध व्यक्तिसंपादित करें

1.सज्जन सिंह् - सज्जन सिंह जी ठाकुर माधो सिंह जी के पुत्र थे इनका जन्म सिन्दरली ग्राम में हुआ बाद में ये देवली रहने लगे य़े सुमेरपुर से विधायक,एक बार प्रधान और दस साल पाली जिले के जिला प्रमुख रहे। [3]

2.नाथू सिंह मेड़तिया - नाथू सिंह मेड़तिया ठाकुर रिड़मल सिंह जी के पुत्र थे ये नाथू सिंह प्रदेश की राजनीती में प्रमुख स्थान रखते थे ये गाव से पचीस साल लगातार सरपंच चुने गए और दो बार देसूरी के प्रधान पद पर निर्वाचित हुए

3.रावत सिंह मेड़तिया - रावत सिंह मेड़तिया इस क्षेत्र में अपने समय में काफी प्रसिद्ध व्यक्ति रहे हैं ये प्रथम विश्व युद्ध (१९१४ -१९१६) में फ्रांस से अपनी वीरता के कारण आईडीएसएम पदक जीत कर आये थे जो उस समय इंडियन ब्रिटिश आर्मी में विक्टोरिया क्रॉस के बाद दूसरा सर्वोच्च पदक था। रावत सिंह ३४ प्रिंस अल्बर्ट विक्टर ऑन पूना हॉर्स की तरफ से लड़े थे

मंदिरसंपादित करें

गाँव में लक्ष्मी भारती जी, भेरू जी मंदिर, अम्बे माँ मंदिर, रावला परिसर में जोगमाया, ठाकुर जी मंदिर तथा तालाब पर पुरा छत्रिया है।

सन्दर्भसंपादित करें

  1. https://www.google.co.in/maps/place/Sindarli,+Rajasthan+306705/@25.2483008,73.4167599,16z/data=!3m1!4b1!4m2!3m1!1s0x39429ce216fdf501:0x30ad96b43231272f
  2. "संग्रहीत प्रति". मूल से 19 अगस्त 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 17 अगस्त 2014.
  3. "संग्रहीत प्रति". मूल से 7 फ़रवरी 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 8 फ़रवरी 2015.