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ओडिशा से प्राप्त सिलीमैनाइट

सिलीमैनाइट (Sillimanite) एक अलुमिनो-सिलिकेट खनिज है जिसका रासायनिक सूत्र Al2SiO5 है। इसका नाम अमेरिका के रसायनशास्त्री बेंजामिन सिलीमैन (1779–1864) के नाम पर पड़ा है। यह खनिज संसार में अनेक स्थानों पर मिलता है किंतु कुछ ही स्थानों पर आर्थिक दृष्टि से इसका खनन लाभदायक है। आर्थिक दृष्टि से उपयोगी सिलीमैनाइट के निक्षेप केवल भारत में ही विद्यमान हैं।

भारत में सिलीमैनाइट सोना पहाड़, जो असम की खासी पहाड़ियों में है, तथा सीधी जिले में पिपरा नामक स्थान पर प्राप्त होता है। कुछ निक्षेप केरल प्रदेश में बालूतट रेत के रूप में भी मिलते हैं। अभी तक सोना पहाड़ और पिपरा के निक्षेपों पर ही खनन कार्य किया गया है।

अनुक्रम

सोना पहाड़संपादित करें

असम की खासी पहाड़ियों में, सोना पहाड़ के निक्षेप स्थित हैं। सिलीमैनाइट अधिकांशत: कोरंडम (Corundum) के साहचर्य में प्राप्त होता है। यह सिलीमैनाइट उत्तम प्रकार का है एवं इसमें रयूटाइल (Reutile), बायोटाइट (Biotite) तथा लौह अयस्क अत्यंत अल्प मात्रा में मिले होते हैं। यह मुख्यत: विशाल गंडाश्मों (Boulders), जिनका व्यास दस फुट तक तथा भार ४० टन तक हो सकता है, के रूप में मिलता है।

पिपरासंपादित करें

मध्य प्रदेश के सीधी जिले में पिपरा नामक स्थान पर सिलीमैनाइट निक्षेप प्राप्त हुए हैं। इसके साहचर्य में भी कोरंडम प्राप्त होता है। यह निक्षेप पिपरा ग्राम से आधा मील की दूरी पर स्थित हैं। पिपरा सिलीमैनाइट का वर्ण भूरा होता है तथा यह असम के सिलीमैनाइट की अपेक्षा अधिक कठोर है। यहाँ पर बड़े-बड़े गंडाश्म, जो अनेक आकार में मिलते हैं, साधारण मिट्टी में खचित पृथ्वी तल पर पड़े रहते हैं।

भंडारसंपादित करें

डॉक्टर डून (Dr. Dunn) के अनुसार पिपरा में सिलीमैनाइट की अनुमानित मात्रा लगभग एक लाख टन है किंतु निक्षेपों के अनियमित होने के कारण ठीक-ठीक अनुमान लगाना कठिन है एवं संभावना है कि वास्तविक मात्रा इससे कहीं अधिक है। इसके अतिरिक्त कुछ ऐसा सिलीमैनाइट भी उपलब्ध है जिसमें कुछ अपद्रव्य हैं तथा इन अपद्रव्यों को उपयुक्त साधनों से दूर कर उपयोग में लाया जा सकता है। इसी प्रकार खासी पहाड़ियों में सिलीमैनाइट की अनुमानित मात्रा ढाई लाख टन के लगभग है।

उपयोगसंपादित करें

तापरोधक सामग्री (Refractory) के अतिरिक्त इसका उपयोग अन्य कार्यों में भी होता है।