मुख्य मेनू खोलें

सुकुल की बीवी भारत के महान कवि एवं रचनाकार सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' द्वारा रचित एक सामाजिक कहानी है[1]। इसमें रूढ़िवादिता और प्रेम को प्रस्तुत किया गया है| इसमें एक ब्राह्मण की अपनी चोटी (धर्म) की प्रति लगाव तथा विधर्मी के प्रति प्रेम के मध्य कशमकश है[2]| यह विधर्मी स्त्री भी ब्राहमण पिता द्वारा माँ को ठुकराए जाने के बाद, सहृदय मुसलमान पुरुष से उत्पन्न पुत्री की कहानी है, जो समयअन्तराल बाद पुनह इसी रूढ़िवादिता की शिकार है| पुस्तक का एक उद्धरण " छोटी बहन, भतीजी, लड़की, भयहू (छोटे भाई की स्त्री) सबके लिए बीबी शब्द आता है| आपकी 'हाँ' किस अर्थ के लिए है?द्वारा लेखक ने पुरुष मानसिकता को स्त्री के शब्दों में व्यक्त किया है|

  1. सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' (1998). सुकुल की बीबी (चार कहानिया). भारती भंडार लीडर प्रेस, इलाहाबाद
  2. सूर्यकांत त्रिपाठी निराला (2008). सुकुल की बीबी. राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली