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सुयज्ञ विष्णु के प्रसिद्ध चौबीस अवतारों में से एक अवतार का नाम है।

परिचयसंपादित करें

भगवान् विष्णु के प्रसिद्ध 24 अवतारों के नाम एवं क्रम में धर्म-शास्त्रीय ग्रंथों में अंतर मिलता है। प्रख्यात वैष्णव ग्रंथ श्रीमद्भागवत महापुराण में ही भगवान् विष्णु के 22 अवतारों की दो सूचियाँ मिलती हैं[1] और दोनों के कतिपय नाम एवं क्रम में अंतर है; हालाँकि उनके 'सुयज्ञ अवतार' का विवरण दोनों स्थलों पर दिया गया है। इसी अवतार को यज्ञ नाम से भी अभिहित किया गया है।[2]

इस अवतार में भगवान् ने रुचि नामक प्रजापति की पत्नी आकूति के गर्भ से 'सुयज्ञ' के रूप में अवतार ग्रहण किया था। इस अवतार में उन्होंने दक्षिणा नाम की पत्नी से सुयम (याम) नाम के देवताओं को उत्पन्न किया तथा तीनों लोकों के बड़े-बड़े संकट हर लिये। इसी कारण स्वायम्भुव मनु ने उन्हें 'हरि' के नाम से पुकारा।[3]

सन्दर्भसंपादित करें

  1. श्रीमद्भागवत महापुराण (सटीक, दो खण्डों में), गीताप्रेस गोरखपुर, संस्करण-2001ई०-1.3.6से25; तथा 2.7.1से38.
  2. श्रीमद्भागवत महापुराण, पूर्ववत्-1.3.12.
  3. श्रीमद्भागवत महापुराण, पूर्ववत्-2.7.2.