सेवा ग्राम आश्रम भारत में गांधी जी द्वारा स्थापित दूसरा महत्वपूर्ण आश्रम है जो सेवाग्राम में स्थित है। उन्होने इससे पूर्व साबरमती में आश्रम की स्थापना की थी। ये आश्रम गांधी जी के रचनात्मक कार्यक्रमो एवम राजनीतिक आंदोलन संचालन का केंद्र हुआ करते थे। साबरमती से 12 मार्च,1930 से 6 अप्रैल,1930 तक उन्होने 'नमक सत्याग्रह' करते हुए दांडी-मार्च किया था। इस आंदोलन में उन्हे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। जेल से वापस लौटने पर उन्होने महाराष्ट्र के नागपुर से 80 किलोमीटर की दूरी पर यह आश्रम स्थापित किया था। आश्रम के लिये जमुनालाल बजाज ने ज़मीन उपलब्ध करायी थी। महात्मा गांधी ने बुनियादी तालीम और प्राक्रितिक शिक्षा से सम्बंधित और कई महत्वपूर्ण प्रयोग किये थे। यह आश्रम 1942 ई. के भारत छोडो आंदोलन और उसके बाद तक रचनात्मक कार्य- खादी, ग्रामोद्योग के साथ-साथ सामाजिक सुधारात्मक कार्य-अस्पृश्यता निवारण तथा अंग्रेजी दासता से मुक्ति का प्रमुख अहिंसात्मक केंद्र बना रहा

इन्हें भी देखेंसंपादित करें