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कंप्यूटर पर किसी प्रोग्राम को चलाने के लिए शुरुआत में की गई व्यवस्था को इंस्टाल (Install) या सेटअप (setup) कहा जाता है। एक बार इंस्टॉल होने के बाद कंप्यूटर प्रोग्राम, यानि सॉफ़्टवेर को सीधे चलाया जा सकता है। वैसे हर प्रोग्राम को चलाने के लिए इंस्टॉल की लंबी प्रक्रिया से नहीं गुज़रना पड़ता।

प्रोग्राम के चलने यानि अपना काम करने को execute या run करना कहते हैं। इस के लिए प्रोग्राम को तैयार करने को installation या setup कहते हैं। इनका ऐसा नाम किसी यंत्र को स्थापित करने की तर्ज पर रखा गया है। जैसे पम्पसेट या एयरकंडीशनर को चलाने से पहले इंस्टाल, यानि स्थापित किया जाता है (तार जोड़ना, पाइप जोड़ना इत्यादि) ताकि वे सुचारु रूप से अपना काम कर सकें।

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इंस्टॉल की आवश्यकता इसलिए पड़ती है कि, कई प्रोग्राम (या सॉफ्टवेर) अन्य प्रोग्रामों पर निर्भर करते हैं। वो जिन् प्रोग्रामों पर आश्रित हैं, उनकी स्थापित मार्ग को ढूंढना, वर्जन पता करना और आपसे में समन्वय बिठाने के लिए व्यवस्था करना इसके मुख्य कारण हैं। कई प्रोग्राम सिस्टम के हिसाब से अपना रूप बदलते हैं, कई सिस्टम पर उपलब्ध प्रोसेसर या मेमोरी या अन्य प्रोग्रामों की उपस्थिति के हिसाब से अपने को चलाना चाहते हैं। इन सभी कारणों से इनको सेटअप (या इंस्टॉल) करना पड़ता है। इंस्टॉल करने की आवश्यकता न रहने से प्रोग्राम को चलाने के लिए बारंबार एक ख़ास समय खोना पड़ता है। इसलिए इंस्टॉल कराया जाता है।