सोहनी महिवाल लोक प्रचलित प्रसिद्ध लोककथा है। इसका संबन्ध पंजाब से है। सोहनी चिनाब के किनारे के एक गाँव के कुम्हार की लड़की थी। सोहनी के रूप गुण पर रीझ कर महिवाल नामक राजकुमा चिनाब के दूसरे किनारे पर धूनी रमाकर बैठ गया। सोहनी प्रतिदिन पक्के घड़े की सहायता से चिनाब तैरकर राजकुमार महिवाल के पास जाया करती थी। एक दिन उसकी भाभी ने देख लिया। उसने चुपके से पक्का घड़ा उठाकर उसके स्थान पर कच्चा घड़ा रख दिया। सोहनी कच्चे घड़े के सहारे चिनाब पार करने लगी। बीच में कच्चा घड़ा फूट गया और सोहनी चिनाब की लहरों में समा गई। "महिवाल" का अर्थ है भैसों का चरवाहा। सोहनी को प्राप्त करने के लिए राजकुमार ने भैसें भी चराईं थीं इसलिए कथा में वह महिवाल हो गया।