इस युग को स्वर्णयुग इस लिये कहा जाता है क्योंकि इस युग में बहुमुखी प्रतिभाओ का ज्ञान था। अनेक विद्वानों के साथ यहां समाज मे आर्थिक सामाजिक विकास भी देखा गया। विद्वान कवि का जन्म के साथ पराक्रमी राजाओ का भी उदय हुआ।