स्वामी नाथ योगी संतो को कहा जाता हैं जो धार्मिक/पंथ समुदाय में दीक्षित हो । सबसे पहले 'स्वामी' शब्द का उपयोग नाथ संप्रदाय के संतों को बोला गया नाथ का अर्थ स्वामी बाद में पत्नियां अपने पति को प्राण नाथ व स्वामी बोल कर सम्भोदित करती थी । मालिक को भी सवामी बोला जाता हे । अद्वैत वेदान्ती



 स्वामी का सामान्य अर्थ है कि जिसने स्वयं के मन को वश में कर लिया हो अर्थात वह स्वयं के मन का स्वामी है। जिसने स्वयं की पांचों इंद्रियों को वश में कर लिया हो। वह एक योगी, संत व सामान्य गृहस्थी भी हो सकता है।