हिन्दू धर्म और बौद्ध धर्म में मन्त्रों के अन्त में स्वाहा उच्चारित किया जाता है जो उस मन्त्र के अन्त का सूचक है। इसे चीनी भाषा में 薩婆訶, sà pó hē, जापानी भाषा में sowaka, तिब्बती भाषा में སྭཱཧཱ་, (soha) कहते हैं। इसका शाब्दिक अर्थ है 'अच्छी तरह से कहा गया' या 'सुभाषित'। यज्ञ करते समय 'स्वाहा' बोला जाता है। सम्भवतः स्वाहा, सु+आह से बना है जिसका अर्थ 'अच्छी तरह से कहा' हुआ।

स्वाहा
भस्म की देवी
नरक, मातृत्व, जीवन तथा विवाह की देवी
स्वाहा
अग्नि, स्वाहा के साथ
संबंध देवी
निवासस्थान अग्निलोक
मंत्र ओम् स्वाहा
जीवनसाथी अग्नि[1]
माता-पिता दक्ष
प्रसूति
भाई-बहन सती
संतान पवमान, पावक, शुचि

स्वाहा धुएँ की देवी और अग्नि देव की पत्नी हैं।

कथासंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. Antonio Rigopoulos (1998). Dattatreya: The Immortal Guru, Yogin, and Avatara: A Study of the Transformative and Inclusive Character of a Multi-faceted Hindu Deity. State University of New York Press. पृ॰ 72. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-7914-3696-7. मूल से 8 जनवरी 2017 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 21 दिसंबर 2018.