होयसाल वास्तु-शैली

होयसाल वास्तु-शैली होयसाल वंश की वास्तु शैली थी।

जो 12 वी से 13 वी सदी के बिच कर्णाटक में होयसल राजाओं ने बनाय था। इसके तिन प्रमुख मंदिर है। [1]द्वारसमुंद्र होयसल राजाओं का प्रचीन राजधानी थी वर्तमान मे होलेवीद कहा जाता है द्वारसमुंद को। 1161 मे होलेवीद मे किंग विष्णुवर्धन ने होय्सलेसवर टेम्पल का निर्माण प्रधान वास्तुकार केत्मल्ला से करवाया।मन्दिर शिव के तारकेश्वरको समर्पित है यह होयसाल वास्तुकलाका सर्वश्रेष्ठ नमूना है।

[2]बेलूर में चिन्केशव टेम्पल का निर्माण विष्णुवर्धन ने 1117 ईसवीं में (विष्णुन को समर्पित ) किया था। [3]सोमनाथपुर मे केसव मंदिर ( विष्णु को समर्पित ) का निर्माण सोमनाथ दंडनायक ने किया था।जो होयसाल किंग नरसिंहा तृतीय के जनरल थे

होयसाल टेम्पल वास्तुशिल्प के प्रमुख विशेषता :

☆ मंदिर शॉप स्टोन या dark schist का बना है।

☆ मंदिर में दो विमान की योजना बनाई गयी हैं।

☆ मन्दिर का आधर अष्टपद या सितारा या तारा की योजना मे बनाया गया है।

☆मन्दिरों में अलंकरण की बहुलता है।

☆ होयसाल शैली के मंदिर में विमान को शिला कहा जाता है जो छोटे आकार के है।

☆ मनिबालाकी , माबाला, केतना, बलाकी होय्सलेसवर मंदिर के शिल्पी थे।