अभाव अर्थव्यवस्था (Shortage economy) किसी देश या प्रान्त की अर्थव्यवस्था में ऐसी परिस्थिति होती है जिसमें उपभोक्ताओं को बाज़ार में कई प्रकार के माल या सेवाओं का अभाव होता है, यानि वह चीज़ें बाज़ार में खरीदने के लिए पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होती। यह स्थिति अक्सर नियोजित अर्थव्यवस्थाओं में उत्पन्न होती है। यह कई समाजवादी और साम्यवादी तंत्रों में देखा जाता है। अन्य आर्थिक तंत्रों में भी किसी माल या सेवा के आर्थिक संतुलन में हस्तक्षेप करने से भी समय के साथ-साथ उस माल या सेवा में अक्सर अभाव उत्पन्न हो जाते हैं।[1][2]

सोवियत संघ में एक बाज़ार में भीड़। वहाँ पूरी तरह से सरकार द्वारा नियोजित अर्थव्यवस्था थी।

नामोत्पत्ति

संपादित करें

"अभाव अर्थव्यवस्था" का सर्वप्रथम ज्ञात उल्लेख हंगरी के एक अर्थशास्त्री, यानोश कोरनाई (János Kornai) ने करा था। उनके कार्यकाल में हंगरी में साम्यवादी व्यवस्था थी।[3][4]

इन्हें भी देखें

संपादित करें
  1. "Problems of the Planned Economy," Murray Milgate and Peter Newman, Palgrave Macmillan UK (Publisher), 1990, ISBN 9781349208630
  2. Samuelson, Paul A.; Nordhaus, William D (2004). Economics. McGraw-Hill. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-07-287205-7.
  3. Kornai, János, Socialist economy, Princeton University Press, 1992, ISBN 0-691-00393-9
  4. Kornai, János, Economics of Shortage, Amsterdam: North Holland Press, Volume A, p. 27; Volume B, p. 196 .