अमृता देवी का जन्म राजस्थान के जोधपुर जिले मे एक जाट किसान परिवार में हुआ था। वह विवाह से पहले अमृता विश्नोई थी, जो विवाह के बाद अमृता देवी बेनीवाल हो गई। पेड़ो और जंगलो को बचाने के लिए उन्होने बहुत सी लड़ाई लड़ी आंदोलन किए। उनका आंदोलन चिपको आंदोलन की तरह ही था। वे अपनी तीन पुत्रियों आशु ,रतनी और भागू के साथ पेड़ो को बचाने के लिए 1730 मे जान दे दी थी। राजस्थान के खेजरी मे करीब 363 बिशनोई ने हरे पेड़ो को काटने से रोकने के लिए जन दे दी थी। इस साल भारत सरकार ने विश्वविद्यालयो मे उनके नाम पर पीठ बनाने का निर्णय लिया है।

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बिश्नोई