अर्जुन मुंडा

भारतीय राजनीतिज्ञ

अर्जुन मुंडा झारखंड प्रान्त के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। महज 35 वर्ष की आयु में मुख्यमंत्री का पद संभालने वाले अर्जुन मुंडा के नाम देश में सबसे कम उम्र में मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है।

अर्जुन मुंडा
जन्म 5 जनवरी 1968
जमशेदपुर
नागरिकता भारत
शिक्षा इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय
पेशा राजनीतिज्ञ
राजनैतिक पार्टी भारतीय जनता पार्टी
धर्म सनातन धर्म
उल्लेखनीय कार्य {{{notable_works}}}
वेबसाइट
http://www.arjunmunda.in/

स्वर्गीय गणेश मुंडा के पुत्र 5 जून 1968 को घोड़ाबाँधा जमशेदपुर में जन्में श्री मुंडा फरवरी 2005 में झारखंड में दूसरी बार मुख्यमंत्री निर्वाचित हुए। मध्य वर्गीय परिवार से आनेवाले श्री मुंडा बिहार औऱ झारखंड विधानसभा में खरसाँवा का प्रतिनिधित्व करते हैं। फिलहाल वे जमशेदपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं। उनका राजनीतिक जीवन 1980 से शुरू हुआ।.उस वक्त अलग झारखंड आंदोलन का दौर था।.अर्जुन मुंडा ने राजनीतिक पारी की शुरुआत झारखंड मुक्ति मोर्चा से की। .आंदोलन में सक्रिय रहते हुए अर्जुन मुंडा ने जनजातीय समुदायों और समाज के पिछड़े तबकों के उत्थान की कोशिश की। .1995 में वे झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार के रूप में खरसावां विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनकर बिहार विधानसभा पहुँचे। बतौर भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी 2000 और 2005 के चुनावों में भी उन्होंने खरसावां से जीत हासिल की। वर्ष 2000 में अलग झारखंड राज्य का गठन होने के बाद अर्जुन मुंडा बाबूलाल मरांडी के कैबिनेट में समाज कल्याण मंत्री बनाये गये। वर्ष 2003 में विरोध के कारण बाबूलाल मरांडी को मुख्यमंत्री के पद से हटना पड़ा. यहीं वक्त था कि एक मजबूत नेता के रूप में पहचान बना चुके अर्जुन मुंडा पर भारतीय जनता पार्टी आलाकमान की नज़र गई। 18 मार्च 2003 को अर्जुन मुंडा झारखंड के दूसरे मुख्यमंत्री चुने गये। उसके बाद 12 मार्च 2005 को दुबारा उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। लेकिन निर्दलीयों से समर्थन नहीं जुटा पाने के कारण उन्हें 14 मार्च 2006 को त्यागपत्र देना पड़ा. इसके बाद मुंडा झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे। . वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें जमशेदपुर लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया। पार्टी के भरोसे पर अर्जुन मुंडा खरा उतरे..उन्होंने लगभग दो लाख के मतों के अन्तर से जीत हासिल की। वे भारतीय जनता पार्टी के दमदार औऱ भरोसेमन्द नेताओं में से एक हैं।.उनकी खूबियों को देखते हुए पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी दी है। 11 सितम्बर 2010 को वे तीसरी बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने।