अल जिहाद फिल इस्लाम (पुस्तक)

अल जिहाद फिल इस्लाम: हिन्दी अर्थ: इस्लाम में जिहाद की अवधारणा) इस्लाम में जिहाद के विषय पर मौलाना सैयद अबुल आला मौदूदी द्वारा लगभग ६०० पृष्ठ में उर्दू में लिखी इसी नाम से एक पुस्तक है। यह जिहाद पर आधारित क्लासिक पुस्तक का अंग्रेजी अनुवाद है, जो मूल रूप से 1927 में उर्दू भाषा में लिखी और प्रकाशित की गई थी। हिंदी में केवल एक अध्याय 'इस्लामी जिहाद की हक़ीकत' का अनुवाद करके 'इस्लामी जिहाद की वास्तविकता'[1] नाम से और मराठी में 'इस्लामी जिहाद (मानवतेची श्रेष्ठतम सेवा) के 'नाम से अनुवाद प्रकाशित हुआ।

अल जिहाद फिल इस्लाम  
लेखक मौलाना सैयद अबुल आला मौदूदी
अनुवादक सैयद रिफ़त शाह (English)
चित्र रचनाकार सैयद फिरासत शाह
देश पाकिस्तान
भाषा ऊर्दू
विषय [जिहाद], अंतर्राष्ट्रीय नीति के बारे में
प्रकाशक मरकज़ी मकतबा-यी इस्लामी, दिल्ली
अंग्रेजी में
प्रकाशित हुई
जून 17, 2017
मीडिया प्रकार पुस्तक छापें
पृष्ठ 632 पृष्ठ
आई॰एस॰बी॰एन॰ 978-1-52-209065-6

पृष्ठभूमि

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मौलाना मोहम्मद अली जौहर की इच्छा कि जिहाद के विषय पर ऐसी पुस्तक लिख दें जिसमें इस्लामी दृष्टिकोण से जिहाद का विवरण हो इस पर मौदूदी ने "अल-जिहाद फि अल-इस्लाम" नामक पुस्तक लिखी। जनता के ध्यान में आने वाला मौदुदी का पहला काम था उस समय सैयद अबुल आला मौदूदी केवल 24 वर्ष के थे।[2]

'100 से भी अधिक पुस्तकें लिखीं। उन की पुस्तकों का देश-विदेश की भाषाओं [3]में रूपांतरण हो चुका है।

बिर्टिश लेखिका हुदा ख़त्ताब के सहयोग[4] से वो इंग्लिश में भी प्रकाशित हुई।

पुस्तक का एक बड़ा हिस्सा विभिन्न धर्मशास्त्रों में न्यायसंगत युद्ध की अवधारणा के तुलनात्मक अध्ययन से संबंधित है। यह पुस्तक प्रथम विश्व युद्ध की विभिन्न महत्वपूर्ण घटनाओं को विस्तार से कवर करती है और युद्ध के संबंध में अंतरराष्ट्रीय समझौतों के संघर्ष और संघर्ष के बाद के विकास का एक महत्वपूर्ण विश्लेषण विश्लेषण प्रदान करती है।

उन्होंने अन्य पुनरुत्थानवादी विचारकों (जैसे कि अयातुल्ला खुमैनी (रुहोल्ला खोमैनी) और सैय्यद कुतुब ) की तुलना में जिहाद पर अधिक रूढ़िवादी रुख अपनाया, सही ढंग से समझे जाने वाले जिहाद और "एक पागल आस्था... खून से लथपथ आंखें, अल्लाहु अकबर चिल्लाना, सिर काटना" के बीच अंतर किया। अविश्वासी जहां कहीं भी किसी को देखते हैं, ला इलाहा इल्लल्लाह [अल्लाह के अलावा कोई पूज्य नहीं है] का आह्वान करते हुए सिर काट देते हैं। भारत के साथ युद्ध विराम (1948 में) के दौरान, उन्होंने कश्मीर में जिहाद छेड़ने का विरोध किया, यह कहते हुए कि जिहाद की घोषणा केवल मुस्लिम सरकारों द्वारा की जा सकती है, धार्मिक नेताओं द्वारा नहीं। [5]

विषय सूची (हिंदी संस्करण)

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  • दो शब्द
  • मानव-प्राण का सम्मान
  • संसार पर इस्लामी शिक्षा का नैतिक प्रभाव
  • क़त्ल जब सत्य और न्याय को अपेक्षित हो
  • सत्य एवं न्याय को अपेक्षित और अनपेक्षित क़त्ल में अन्तर
  • अवश्यम्भावी रक्तपात
  • सामूहिक उपद्रव
  • युद्धः एक नैतिक कर्तव्य
  • युद्ध का निहित उद्देश्य
  • ईश्वरीय मार्ग में युद्ध (जिहाद) की आवश्यकता
  • सत्य-असत्य का सीमा-निर्धारण
  • ईश्वर के मार्ग में जिहाद की विशिष्टता
  • युद्ध की महत्ता का कारण
  • सामाजिक व्यवस्था में जिहाद का स्थान

उर्दू के शीर्षक (मूल संस्करण)[2]

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  • बाब अव्वल: इस्लामी जिहाद की हक़ीक़त
  • बाब दोम: मुदाफ़आना जंग (रक्षात्मक युद्ध)
  • बाब सोम : मुसल्लेहाना जंग (शांतिपूर्ण युद्ध)
  • बाब चहारुम: इशाअत इस्लाम और तलवार
  • बाब पंजुम: इस्लामी कानून सुलह व जंग
  • बाब शुशम : जंग दूसरे मज़ाहिब में
  • बाब हफ़तुम: जंग तहज़ीब जदीद में
  • तबसरा

अल्लामा इकबाल ने इस पुस्तक के बारे में कहा था: [6] "यह जिहाद की इस्लामी विचारधारा और उसके शांति और युद्ध के कानून पर एक उत्कृष्ट काम है और मैं हर जानकार व्यक्ति को इसका अध्ययन करने की सलाह देता हूं।

इन्हें भी देखें

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  1. Abul Aala maudidi. इस्लामी जिहाद की वास्तविकता.
  2. "(الجہاد فی الاسلام (مودودی". मूल से 11 मई 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 9 जून 2020. Cite journal requires |journal= (मदद)
  3. मौैलाना, अबुल आला मौदूदी (2008). सत्य धर्म (प्रथम संस्करण). दिल्ली: जमात ए इस्लामी हिन्द. पृ॰ लेखक-परिचय. मूल से 1 नवंबर 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 9 जून 2020.
  4. Professor Khurshid, Huda Khattab (2008). Maulana Maududi on Jihad in Islam (प्रथम संस्करण). दिल्ली: जमात ए इस्लामी हिन्द. पृ॰ ?. मूल से 18 नवंबर 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 9 जून 2020.
  5. Nasr, Mawdudi and Islamic Revivalism 1996, पृष्ठ 74
  6. Jamal Malik, "Maudūdī’s al-Jihād fi’l-Islām. A Neglected Document" in Zeitschrift für Religionswissenschaft, volume 17, issue 1 (2009), p. 63

बाहरी कड़ियाँ

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