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उद्गीथाचार्य ऋग्वेद के प्रमुख भाष्यकारों में एक थे। आचार्य उद्गीथ सायणाचार्य के पूर्ववर्ती थे। इनका निवास कर्नाटक के निकट था। आचार्य सायण ने अपने भाष्य में इनकी व्याख्या का उपयोग किया है।[1]

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. वैदिक साहित्य और संस्कृति, आचार्य बलदेव उपाध्याय, शारदा संस्थान, वाराणसी, संस्करण-2006, पृष्ठ-47.

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें