इण्डियन एयरलाइंस फ्लाइट ८१४

इंडियन एयरलाइंस फ्लाईट 814 (कॉल साइन आईसी-814) त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (काठमांडू, नेपाल) से इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (दिल्ली, भारत) जाने वाली एक इंडियन एयरलाइंस एयरबस ए300 थी जिसका अपहरण कर लिया गया था। एक पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन हरकत उल मुजाहिदीन पर इसके अपहरण का आरोप लगाया गया था।

Indian Airlines Flight 814
चित्र:KandaharHijacking.jpg
इंडियन एयरलाइंस के विमान आईसी-814
Hijacking सारांश
तिथि 24 December 1999 – 31 December 1999
प्रकार Hijacking
स्थल Hijacked in Indian airspace between Kathmandu, Nepal and Delhi, India; landed at Amritsar, India; Lahore, Pakistan; Dubai, United Arab Emirates; and Kandahar, Afghanistan.
यात्री 176 (including 5 hijackers)
कर्मीदल 15
क्षति 17
हताहत 1
उत्तरजीवी 190
यान का प्रकार Airbus A300B2-101
संचालक Indian Airlines
पंजीकरण संख्या VT-EDW
उड़ान उद्गम Tribhuvan International Airport
Kathmandu, Nepal
गंतव्य Indira Gandhi International Airport
Delhi, India

लगभग 17:30 बजे आईएसटी (IST) पर भारतीय हवाई क्षेत्र में प्रवेश के तुरंत बाद सशस्त्र बंदूकधारियों ने विमान का अपहरण कर लिया था। अमृतसर, लाहौर और दुबई की धरती को छूने के बाद अपहरण कर्ताओं ने विमान को कंधार, अफगानिस्तान में उतरने के लिए मजबूर किया। अपहर्ताओं ने 176 यात्रियों में से 27 को दुबई में छोड़ दिया लेकिन एक को बुरी तरह चाकू से मारा और कई अन्य को घायल कर दिया।

अफगानिस्तान में तालिबान-हुकूमत के बारे में भारत की कम जानकारी ने भारतीय अधिकारियों और अपहर्ताओं के बीच वार्ताओं को मुश्किल बना दिया। तालिबान ने भारतीय विशेष सैन्य बलों द्वारा विमान पर धावा बोलने से रोकने की कोशिश में अपने सशस्त्र लड़ाकों को अपहृत विमान के पास तैनात कर दिया। अपहरण का यह सिलसिला सात दिनों तक चला और भारत द्वारा तीन इस्लामी आतंकवादियों - मुश्ताक अहमद जरगर, अहमद उमर सईद शेख़ (जिसे बाद में डेनियल पर्ल की हत्या के लिए गिरफ्तार कर लिया गया) और मौलाना मसूद अज़हर (जिसने बाद में जैश-ए-मुहम्मद की स्थापना की) को रिहा करने के बाद समाप्त हुआ।[1]

भारतीय और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने अपहर्ताओं, अल-कायदा और तालिबान के बीच प्रामाणिक संबंध होने की रिपोर्ट दी। पांच अपहरणकर्ताओं और तीन रिहा किये गए आतंकवादियों को तालिबान द्वारा एक सुरक्षित मार्ग प्रदान किया गया। तालिबान द्वारा संदिग्ध भूमिका निभाये जाने की व्यापक रूप से निंदा की गयी थी और इसके बाद यह भारत एवं तालिबान के बीच संबंधों की समाप्ति का कारण बना।

यात्रीसंपादित करें

विमान में 178 यात्री सवार थे जिनमें से ज्यादातर भारतीय नागरिक थे जो नेपाल में छुट्टी बिताने के बाद भारत वापस आ रहे थे।[2]

अपहरणसंपादित करें

इंडियन एयरलाइंस फ्लाईट 814 (वीटी-ईडीडब्ल्यू) (VT-EDW) का अपहरण शुक्रवार, 24 दिसम्बर 1999 को भारतीय मानक समय लगभग 05:30 बजे विमान के भारतीय हवाई क्षेत्र में प्रवेश के कुछ ही समय बाद कर लिया गया था।[3] भारत सरकार के अनुसार अपहर्ताओं की पहचान इस प्रकार थी:[4]

  1. इब्राहिम अतहर, बहावलपुर, पाकिस्तान
  2. शाहिद अख्तर सईद, कराची, पाकिस्तान
  3. सन्नी अहमद काजी, कराची, पाकिस्तान
  4. मिस्त्री जहूर इब्राहिम, कराची, पाकिस्तान
  5. शकीर, सुक्कुर, पाकिस्तान

आईसी-814 पर मौजूद मुख्य फ्लाईट अटेंडेंट अनिल शर्मा ने बाद में बताया कि एक नकाबपोश, चश्माधारी आदमी ने विमान को बम से उड़ा देने की धमकी दी थी और कप्तान देवी शरण को "पश्चिम की ओर उड़ान भरने" का आदेश दिया था।[5] अपहर्ता चाहते थे कि कप्तान शरण विमान को लखनऊ के ऊपर से होते हुए लाहौर की ओर ले जाएं लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने तुरंत इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया क्योंकि वे आतंकवादियों के साथ संबंध जोड़े जाने से प्रति सचेत थे। इसके अलावा ईंधन भी पर्याप्त नहीं था। कप्तान शरण ने अपहर्ताओं से कहा कि उन्हें अमृतसर, भारत में उतरना होगा। [5]

अमृतसर, भारत में लैंडिंगसंपादित करें

अमृतसर में कप्तान शरण ने विमान में दुबारा ईंधन भरने का अनुरोध किया। हालांकि, दिल्ली में आपदा प्रबंधन समूह ने अमृतसर हवाई अड्डे के अधिकारियों को यह सुनिश्चित कर लेने का निर्देश दिया कि विमान स्थिर था, जहां पंजाब पुलिस के सशस्त्र कर्मी इस कोशिश के लिए पहले से मौजूद थे। उन्हें नई दिल्ली से स्वीकृति नहीं मिली थी। अंततः एक ईंधन टैंकर भेजा गया और विमान तक पहुँच को बंद कर देने का निर्देश दिया। जैसे ही टैंकर विमान की ओर भागा, हवाई यातायात नियंत्रण ने पायलट को धीमा करने का रेडियो संदेश भेजा और टैंकर तुरंत रुक गया। इस तरह अचानक रुक जाने से अपहर्ताओं का संदेह बढ़ गया और उन्होंने हवाई यातायात नियंत्रण से मंजूरी के बिना विमान को तुरंत वहाँ से दूर ले जाने के लिए मज़बूर कर दिया। टैंकर विमान से कुछ ही फीट की दूरी पर रह गया था।[6]

लाहौर, पाकिस्तान में लैंडिंगसंपादित करें

अत्यंत न्यूनतम ईंधन स्तर के कारण विमान ने लाहौर, पाकिस्तान में आपात लैंडिंग का अनुरोध किया। पाकिस्तान ने इस डर से अनुरोध को ठुकरा दिया कि आतंकवादियों के साथ उनके देश का नाम जोड़ा जा सकता था। पाकिस्तान ने अपनी हवाई यातायात सेवाओं को भी बंद कर दिया, इस प्रकार इंडियन एयरलाइंस फ्लाईट के लिए समूचे पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र प्रभावी रूप से प्रबंधित हो गया और लाहौर हवाई अड्डे पर सभी लाइटें बंद कर दी गयीं। [7] एटीसी से कोई भी मदद नहीं मिलाने से कप्तान शरण ने अपनी दृश्यात्मक प्रेरणा पर भरोसा किया और वहाँ उतरना शुरू कर दिया जिसे उन्होंने एक रनवे सोचा था और बाद में पाया कि यह केवल एक अच्छी रोशनी वाली सड़क थी और फिर समय पर विमान को उड़ा ले गए।[8] यह समझ लेने के बाद कि विमान के लिए एकमात्र अन्य विकल्प जमीन पर धराशायी कर देना ही शेष बचा था, लाहौर हवाई अड्डे ने अपनी लाइटें ऑन कर दी और विमान को उतरने की अनुमति दे दी। लाहौर हवाई अड्डे के अधिकारियों ने विमान में इंधन भरा और भारतीय मानक समय (IST) 22:32 बजे इसे लाहौर छोड़ने के लिए अनुमति दे दी। इसके अलावा, पाकिस्तानी अधिकारियों ने यात्रियों में से कुछ महिलाओं और बच्चों को उतार देने के आईसी-814 के पायलट के अनुरोध को ठुकरा दिया। [9]

दुबई, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में लैंडिंगसंपादित करें

विमान ने दुबई के लिए उड़ान भरी जहाँ बदनसीब विमान में सवार 27 यात्रियों को छोड़ दिया गया।[9] अपहर्ताओं ने बुरी तरह से घायल 25 वर्षीय भारतीय पुरुष रिपन कात्याल को भी छोड़ दिया जिसपर अपहर्ताओं ने कई बार चाकू से वार किया था। बाद में रिपन ने अपनी चोटों के आगे घुटने टेक दिए और अपहरण का एकमात्र मृतक व्यक्ति बन गया।[10]

इन यात्रियों को छोड़े जाने के फौरन बाद अपहृत विमान कंधार अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए रवाना हो गया।[3]

कंधार, अफगानिस्तान में लैंडिंगसंपादित करें

कंधार में विमान के उतरने के बाद तालिबानी अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त करने की एक कोशिश में भारतीय अधिकारियों के साथ सहयोग करने और अपहर्ताओं एवं भारत सरकार के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की सहमति दे दी। [11] चूंकि भारत ने तालिबान-हुकूमत को मान्यता नहीं दी थी, इसने इस्लामाबाद में अपने उच्चायोग से एक अधिकारी को कंधार भेजा.[9] तालिबान-हुकूमत के साथ भारत के पूर्व संपर्क ना होने के कारण बातचीत की प्रक्रिया जटिल हो गयी थी।[12][13]

हालांकि तालिबान का इरादा तब संदेह के दायरे में आ गया जब इसके सशस्त्र लड़ाकों ने अपहृत विमान को घेर लिया।[14] तालिबान का कहना था कि सैन्य बलों को अपहर्ताओं द्वारा बंधकों को मारने या घायल करने से रोकने के प्रयास में तैनात किया गया था लेकिन कुछ विश्लेषक मानते हैं कि ऐसा अपहर्ताओं के खिलाफ भारतीय सैन्य ऑपरेशन को रोकने के लिए किया गया था।[15][16]

आतंकवादियों की रिहाईसंपादित करें

अपहर्ताओं ने शुरू में भारतीय जेलों में कैद 35 इस्लामी उग्रवादियों की रिहाई और 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर नगद की मांग की थी[15] लेकिन भारतीय वार्ताकार उनकी मांग को तीन कैदियों की रिहाई तक कम करने के लिए अपहर्ताओं को मनाने में कामयाब रहे। ये कैदी थे:[17]

  • मौलाना मसूद अजहर - सन 2000 में जैश-ए-मोहम्मद का गठन किया था जिसे 2001 में भारतीय संसद पर हमले में तथाकथित भूमिका से कुख्याति हासिल हुई थी।[18][19]
  • अहमद उमर सईद शेख - डेनियल पर्ल के अपहरण और हत्या के लिए पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा 2002 में गिरफ्तार.[20][21]
  • मुश्ताक अहमद ज़रगर - रिहाई के बाद से पाकिस्तान-प्रशासित-कश्मीर में इस्लामी उग्रवादियों को प्रशिक्षण देने में एक सक्रिय भूमिका निभाई है।[22]

अहमद उमर सईद शेख, जिसे 1994 में भारत में पश्चिमी देशों के पर्यटकों के अपहरण से संदर्भ में कैद किया गया था, उसी ने डैनियल पर्ल की हत्या की थी और कथित तौर पर अमेरिका में 11 सितंबर के हमलों की योजना तैयार करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।[23]

तीनों आतंकवादियों के कंधार में उतरने के बाद विमान पर सवार बंधकों को रिहा कर दिया गया था। 31 दिसम्बर 1999 को इंडियन एयरलाइंस फलाइट 814 के छोड़े गए बंधकों ने एक विशेष विमान पर वापस भारत के लिए उड़ान भरी।

लोकप्रिय संस्कृति मेंसंपादित करें

  • गुड़गांव, हरियाणा की कंपनी मिडीटेक ने पुनर्व्यवास्थापन के साथ एक वृत्तचित्र, एयर हाइजैक बनाया था; इस वृत्तचित्र नेशनल ज्योग्राफिक चैनल पर दिखाया गया था।[24][25]

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

  • 173 आवर्स इन कैप्टिविटी, अपहरण के बारे में पुस्तक
  • एयर इंडिया फ़्लाइट 182
  • एयर फ्रांस फलाइट 8969
  • ओमेर्टा

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "ओमेर्टा : यहां पर दुनिया को मिले सबसे बड़े जख्मों की कहानी देखने को मिल सकती है". मूल से 27 सितंबर 2021 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 16 अप्रैल 2018.
  2. "एयर हाइजैक." [वृत्तचित्र टीवी शो] मिडीटेक .
  3. Vohra, Ranbir (2000). The making of India. M.E. Sharpe. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9780765607119. मूल से 11 जनवरी 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 11 अक्तूबर 2010.
  4. भारतीय दूतावास: अपहर्ताओं की पहचान Archived 2010-06-18 at the Wayback Machine.
  5. "How Govt lost the IC-814 hijack deal". 2006-09-07. मूल से 13 सितंबर 2008 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2006-09-07.
  6. "Cover Story: Hijacking; ... in Amritsar, a speeding tanker causes panic". India-today.com. 2000-01-10. मूल से 11 अगस्त 2010 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2010-06-08.
  7. "Cover Story: Hijacking; ... in Lahore, there is a political sideshow". India-today.com. 2000-01-10. मूल से 13 अक्तूबर 2010 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2010-06-08.
  8. "संग्रहीत प्रति". मूल से 13 जुलाई 2011 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 11 अक्तूबर 2010.
  9. "ज्योतिन्द्र नाथ दीक्षित की पुस्तक इंडिया-पाकिस्तान इन वार एंड पीस". मूल से 3 जनवरी 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 16 जून 2020.
  10. "आठ-दिन की एक अग्निपरीक्षा". मूल से 23 दिसंबर 2010 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 11 अक्तूबर 2010.
  11. "श्रीकांत घोष की पुस्तक पाकिस्तान्स आईएसआई". मूल से 19 दिसंबर 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 16 जून 2020.
  12. "डेविड वान प्राघ की पुस्तक द ग्रेटर गेम". मूल से 6 जुलाई 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 16 जून 2020.
  13. रिडेल, ब्रूस. "द सर्च फॉर अल-कायदा", 2008
  14. "गिरिराज शाह द्वारा लिखित हाईजैकिंग एंड टेरर इन स्काई". मूल से 6 जुलाई 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 16 जून 2020.
  15. "रोहन गुणरत्न द्वारा लिखित इनसाइड अल कायदा". मूल से 6 जुलाई 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 16 जून 2020.
  16. "जे पॉल डी बी. टैलोन द्वारा लिखित हाइजैकिंग एंड होस्टेजेज". मूल से 6 जुलाई 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 16 जून 2020.
  17. "भारतीय दूतावास". मूल से 18 जून 2010 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 11 अक्तूबर 2010.
  18. द इंडिपेंडेंट: भारत द्वारा पाकिस्तान पर संसद पर हमले का आरोप लगाया गया Archived 2008-12-21 at the Wayback Machine.
  19. "गुटमैन रॉय द्वारा लिखित हाउ वी मिस्ड द स्टोरी". मूल से 14 मई 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 16 जून 2020.
  20. "Profile: Omar Saeed Sheikh". बीबीसी न्यूज़. 2002-07-16. मूल से 7 मई 2009 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2010-05-05.
  21. "ऑनलाइन न्यूजआवर अपडेट: पाकिस्तान ने पर्ल की हत्या में चार लोगों को दोषी ठहराया - 15 जुलाई 2002". मूल से 5 नवंबर 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 11 अक्तूबर 2010.
  22. Abhinandan Mishra (2008-07-27). [8126110902http://desicritics.org/2008/07/27/132626.php "India's Response To Terrorism - Are We Losing The War?"] जाँचें |url= मान (मदद). मूल से 4 अगस्त 2008 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2008-08-04.
  23. सीएनएन ट्रांसक्रिप्ट ""Suspected Mastermind of Pearl Killing Arrested"". CNN. 2001-02-07. मूल से 22 मई 2011 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2006-06-29. 12 फ़रवरी 2002.
  24. "आईसी 814 अपहरण". मूल से 14 मई 2008 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 11 अक्तूबर 2010.
  25. "द हिन्दू: नई दिल्ली समाचार: इनसाइड द वर्ल्ड ऑफ टेरर". मूल से 22 जनवरी 2009 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 11 अक्तूबर 2010.

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें

साँचा:Aviation incidents and accidents in 1999