उत्तराखण्ड का राज्य-चिह्न

उत्तराखण्ड का राज्य-चिह्न अथवा उत्तराखण्ड का प्रतीक-चिह्न, उत्तराखण्ड सरकार की राजकीय मोहर है, जिसका उपयोग राज्य द्वारा सभी प्रकार के प्रशासनिक एवं राजकीय क्रियाकलापों में उत्तराखण्ड राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिये किया जाता है।[1] इसे उत्तराखण्ड राज्य की स्थापना के समय दिनाँक ९ नवम्बर २००० को राज्य की नवगठित अन्तरिम सरकार द्वारा अधिकृत किया गया था।

उत्तराखण्ड का राज्य-चिह्न
विवरण
सामंत उत्तराखण्ड सरकार
अपनाया गया ९ नवम्बर २०००
कलग़ी लाल पृष्ठभूमि पर आकृत अशोक की लाट
ढाल श्वेत पृष्ठभूमि एवं नीली परिधि सहित चार जलधाराओं से युक्त हीरे के आकार वाला प्रतीक चिह्न
सहायक हिमालय पर्वत के शिखर
ध्येयवाक्य "सत्यमेव जयते" (भारत का राष्ट्रीय उद्घोष)
अन्य तत्व चिह्न के निचले भाग पर नीले रंग में अंकित "उत्तराखण्ड राज्य"
प्रयोग उत्तराखण्ड राज्य का राजकीय प्रतिनिधित्व

उत्तराखण्ड का राज्य-चिह्न श्वेत पृष्ठभूमि एवं नीली परिधि सहित चार जलधाराओं से युक्त हीरे के आकार वाला प्रतीक-चिह्न है, जिसे हिमालय पर्वत के शिखरों द्वारा सहारा देते हुए दर्शाया गया है। इसके ऊपरी भाग पर बनी कलग़ी में लाल पृष्ठभूमि युक्त भारत का राष्ट्रीय चिह्न, अशोक की लाट आकृत है, जिसके नीचे संस्कृत में भारत का राष्ट्रीय उद्घोष, सत्यमेव जयते संलग्न है। राज्य-चिह्न के निचले भाग पर नीले रंग में "उत्तराखण्ड राज्य" अंकित है।

प्रतीकात्मकता

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राज्य-चिह्न के ऊपरी भाग में दर्शायी गयी लाल रंग की पृष्ठभूमि, उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के दौरान शहीद हुए राज्य आन्दोलनकारियों के रक्त की प्रतीक है। श्वेत रंग की पृष्ठभूमि शान्तिप्रिय प्रकृति वाले उत्तराखण्डवासियों की प्रतीक है। पर्वतशिखर हिमालयी राज्य की भौगोलिक एवं पारस्थितिक प्रकृति को दर्शाता है तथा चार जलधारायें राज्य की चार बड़ी नदियों; गंगा, यमुना, काली एवं रामगंगा को दर्शाती हैं,

  1. "उत्तराखण्ड सरकार (राजकीय जालपृष्ठ)". मूल से 14 जून 2011 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 20 फ़रवरी 2016.