कड़ा-माणिकपुर मध्ययुगीन भारत में एक सूबा (प्रांत) था। यह सूबा दो गढ़ों: कड़ा और माणिकपुर से मिलकर बना था जो गंगा नदी के दोनो किनारों पर आमने सामने स्थित थे। आज यह भारत के राज्य उत्तर प्रदेश का हिस्सा हैं।

ग्यारहवीं शताब्दी में इस्लाम के योद्धा संत गाजी सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी ने माणिकपुर और कड़ा के सरदारों को हराया था, हालांकि यहाँ मुस्लिम शासन की स्थापना मोहम्मद ग़ोरी के हाथों जयचंद्र की हार के बाद ही हुई थी। प्रारंभिक मुस्लिम काल में माणिकपुर और कड़ा दोनो ही सरकार के महत्वपूर्ण आधार थे। अपने चाचा को मणिकपुर और कड़ा के बीच वाली नदी की रेती पर मारकर दिल्ली का सिंहासन हासिल करने से पहले अलाउद्दीन खिलजी यहां के राज्यपाल थे।

पंद्रहवीं शताब्दी में, यह सूबा कुछ समय के लिए जौनपुर के शार्की राजाओं के शासन के आधीन आ गया था लेकिन जल्द ही यह फिर से दिल्ली के शासन के आधीन आ गया। इस पर कब्जे के लिए मुस्लिमों और राजपूत शासकों के मध्य संघर्ष जारी रहे। अफगानों ने सूबे पर अपनी मजबूत पकड़ बरकरार रखी और अकबर के शासनकाल की शुरुआत में (16 वीं सदी के मध्य), माणिकपुर के राज्यपाल ने विद्रोह किया।

इनका नाम अभी भी कड़ा-माणिकपुर ही है, हालांकि कड़ा अब कौशांबी जिले का हिस्सा है, जबकि माणिकपुर प्रतापगढ़ जिले में पड़ता है।

सन्दर्भसंपादित करें