कवि सम्मेलन हिंदी कवियों के काव्यपाठ का आयोजन है।

आयोजकसंपादित करें

हिन्दी प्रेमी पूरी दुनिया में हिन्दी कवि सम्मेलन आयोजित करवाते हैं। विश्व का कोई भी भाग आज कवि सम्मेलनों से अछूता नहीं है। भारत के बाद सबसे अधिक कवि सम्मेलन आयोजित करवाने वाले देशों में अमरीका[1][2], दुबई[3], ओमान, सिंगापुर[4], ब्रिटेन, हांगकांग, नेपाल, तंज़ानिया, कीनिया, ऑस्ट्रेलिया, थाईलैंड, रूस इत्यादि शामिल हैं। इनमें से अधिकतर कवि सम्मेलनों में भारत के प्रसिद्ध कवियों को आमंत्रित किया जाता है। भारत में वर्ष भर कवि सम्मेलन आयोजित होते रहते हैं। भारत में कवि सम्मेलन के आयोजकों में सामाजिक संस्थाएं, सांस्कृतिक संस्थाएं, सरकारी संस्थान, कार्पोरेट और शैक्षिक संस्थान अग्रणी हैं। पुराने समय में सामाजिक संस्थान सबसे ज़्यादा कवि-सम्मेलन करवाते थे, लेकिन इस सहस्त्राब्दी के शुरूआत से शैक्षिक संस्थानों ने सबसे ज़्यादा सम्मेलन आयोजित किए हैं।

कवि सम्मेलनों के आयोजन के ढंग में भी भारी बदलाव आए हैं। यहां तक कि अब कवि सम्मेलन इंटरनेट पर भी बुक किए जाते हैं[5]

स्वरूपसंपादित करें

कवि सम्मेलन के पारम्परिक रूप में अब तक बहुत अधिक बदलाव नहीं देखे गए हैं। एक पारम्परिक कवि सम्मेलन में अलग अलग रसों के कुछ कवि होते हैं और एक संचालक होता है। कवियों की कुल संख्या वैसे तो २० या ३० तक भी होती है, लेकिन साधरणत: एक कवि सम्मेलन में ७ से १२ तक कवि होते हैं। २००५ के आस पास से कवि सम्मेलन के ढांचे में कुछ बदलाव देख्ने को मिले। अब तो एकल कवि सम्मेलन भी आयोजित किए जाते हैं[6] (हालांकि उसे कवि-सम्मेलन कहना उचित नहीं है क्योंकि सम्मेलन बहुवचन में आता है, परन्तु अब ऐसे भी काव्य पाठ हो रहे हैं)। एक पारम्परिक कवि सम्मेलन में कवि मंच पर रखे गद्दे पर बैठते हैं। मंच पर दो माईकें होती हैं- एक वह, जिस पर खड़े हो कर कवि एक एक कर के कविता-पाठ करते हैं और दूसरा वो, जिसके सामने संचालक बैठा रहता है। संचालक सर्वप्रथम सभी कवियों का परिचय करवाता है और उसके बाद एक एक कर के उन्हें काव्य-पाठ के लिए आमंत्रित करता है। इसका क्रम साधारणतया कनिष्ठतम कवि से वरिष्ठतम कवि तक होता है। किन्तु जैसे जैसे समय बदला है, वैसे-वैसे कवि-सम्मेलनों का प्रारूप भी बदल गया है. अब मंच पर सोफे और हैंड्स फ्री माइक की व्यवस्थाएं आम हो गई हैं।

प्रमुख कविसंपादित करें

कवि सम्मेलनों की परम्परा में अनेक लोकप्रिय नाम गिने जा सकते हैं। पहला कवि-सम्मेलन वर्ष 1920 में जॉर्ज ग्रियर्सन ने कानपुर में करवाया, जो कि गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' के संयोजन में हुआ और जिसका मंच संचालन अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध ने किया। कवि-सम्मेलन के प्ररंभिक हस्ताक्षरों से शुरू करें तो गोपाल सिंह 'नेपाली', बलवीर सिंह 'रंग', सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, गिरिजा कुमार माथुर, भगवती चरण वर्मा, वियोगी हरि, मैथिलीशरण गुप्त, सोहनलाल द्विवेदी, श्यामनारायण पांडेय, रामधारी सिंह 'दिनकर', हरिवंश राय बच्चन, शिवमंगल सिंह 'सुमन', भरत व्यास, महिपाल, बालकृष्ण शर्मा 'नवीन', गोपाल प्रसाद व्यास, गोपाल दास नीरज, सोम ठाकुर, संतोष आनंद, बालकवि बैरागी, बेकल उत्साही, भारत भूषण, किशन सरोज, उदयप्रताप सिंह, माणिक वर्मा, राधेश्याम प्रगल्भ, काका हाथरसी, रामरिख मनहर, विमलेश राजस्थानी, रामावतार त्यागी, रमानाथ अवस्थी, नरेंद्र शर्मा, शिशुपाल सिंह 'शिशु', शैल चतुर्वेदी, शिशुपाल सिंह 'निर्धन', देवराज दिनेश, निर्भय हाथरसी, आत्मप्रकाश शुक्ल, सत्यनारायण सत्तन, गोविन्द व्यास, हुल्लड़ मुरादाबादी, भवानी प्रसाद मिश्र, सुरेंद्र शर्मा, अशोक चक्रधर, हरिओम पंवार, महेश्वर तिवारी, नरेंद्र मिश्र, विश्वेश्वर शर्मा, राजगोपाल सिंह, ओमप्रकाश आदित्य, अल्हड बीकानेरी, जैमिनी हरयाणवी, कुंवर बेचैन, वीरेंद्र मिश्र, प्रदीप चौबे, नंदकिशोर किशोर, रमेश गौड़, विष्णु विराट, शिवओम अम्बर, गंगाशरण तृषित, सत्यपाल सक्सेना, राजेंद्र राजन, शेरजंग गर्ग, बालस्वरूप राही, बरसानेलाल चतुर्वेदी, शम्भुनाथ सिंह, रवींद्र भंवर, बृजेन्द्र अवस्थी, उर्मिलेश शंखधर, विजय किशोर मानव, विमल विभाकर, शरद जोशी, घनश्याम अग्रवाल, नीरज पुरी, कृष्ण मित्र, बलवीर सिंह करुण, मधुर शास्त्री, जगदीश सोलंकी, अब्दुल जब्बार, मोहन सोनी, सरोज कुमार, हेमंत श्रीमाल, सुरेश उपाध्याय, सुरेश नीरव, मधुप पांडेय, आशकरण अटल, वीनू महेंद्र, ओम व्यास ओम, के पी सक्सेना, देवल आशीष, रामेन्द्र मोहन त्रिपाठी, मनोहर मनोज, गुरु सक्सेना, अरुण जैमिनी, विष्णु सक्सेना, विनीत चौहान, महेंद्र अजनबी, सुनील जोगी, प्रवीण शुक्ल, कुमार विश्वास, शैलेश लोढ़ा, आशीष अनल, सुरेंद्र दुबे, वेदप्रकाश वेद, पवन दीक्षित, गजेंद्र सोलंकी, विनय विश्वास, संजय झाला, सम्पत सरल[मृत कड़ियाँ],सुभाष काबरा, दिनेश रघुवंशी, डॉ सुरेश, मासूम ग़ज़ियाबादी, अर्जुन सिसोदिया, गुणवीर राणा, श्रवण राही, मदन मोहन समर, अशोक भाटी, तेज नारायण शर्मा, गोविन्द राठी, रास बिहारी गौड़, सर्वेश अस्थाना, रमेश बांसुरी, रमेश मुस्कान, कमलेश शर्मा, मनवीर मधुर, चिराग़ जैन, चन्दन राय, गौरव शर्मा, रमेश शर्मा, प्रताप फौजदार, सुदीप भोला, अशोक चारण, प्रियांशु गजेंद्र, जीतेन्द्र कानपुरी ,शम्भू शिखर और राजीव राज तक कवियों की एक लम्बी सूची है.

मंच पर कवयित्रियों का प्रसंग महादेवी वर्मा से शुरू होता है, किन्तु कुछेक कवि-सम्मेलनों के बाद उन्होंने महात्मा गांधी की सलाह पर कवि-सम्मेलनों में भाग लेना छोड़ दिया था. किन्तु उसके बाद सुभद्रा कुमारी चौहान, विद्यापति कोकिल, ज्ञानवती सक्सेना, स्नेहलता स्नेह, गिरिजा व्यास, माया गोविन्द, प्रभा ठाकुर, एकता शबनम, शशि तिवारी, सरोजिनी प्रीतम, इंदिरा गौड़, इंदिरा इंदु, इंदिरा मोहन, सरिता शर्मा, कीर्ति काले, सीता सागर, मधुमिता शुक्ला, मधुरिमा सिंह, मधुमोहिनी उपाध्याय, कविता किरण, पूनम वर्मा, प्रज्ञा शर्मा, मुमताज़ नसीम, सोनरूपा विशाल और मनीषा शुक्ला तक श्रेष्ठ कवयित्रियों की एक लम्बी परम्परा कवि सम्मेलनों को समृद्ध कर रही है.
  1. http://www.sfindian.com/bay-area/eventDisplay.asp?id=18074
  2. "संग्रहीत प्रति". मूल से 24 जुलाई 2012 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 18 जून 2010.
  3. "संग्रहीत प्रति". मूल से 7 मार्च 2009 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 18 जून 2010.
  4. "संग्रहीत प्रति". मूल से 6 नवंबर 2011 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 18 जून 2010.
  5. Gram, Kavi. "Kavi Sammelan Organizers". KaviGram.
  6. "संग्रहीत प्रति". मूल से 14 जुलाई 2011 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 18 जून 2010.