कवि वह है जो भावों को रसाभिषिक्त अभिव्यक्ति देता है और सामान्य अथवा स्पष्ट के परे गहन यथार्थ का वर्णन करता है। इसीलिये वैदिक काल में ऋषय: मन्त्रदृष्टार: कवय: क्रान्तदर्शिन: अर्थात् ऋषि को मन्त्रदृष्टा और कवि को क्रान्तदर्शी कहा गया है। "जहाँ न पहुँचे रवि, वहाँ पहुँचे कवि" इस लोकोक्ति को एक दोहे के माध्यम से अभिव्यक्ति दी गयी है: "जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ, कवि पहुँचे तत्काल। दिन में कवि का काम क्या, निशि में करे कमाल।।"

शायरसंपादित करें

शायरी लिखने वाले कवि को शायर कहा जाता है। शायरी भारतीय उपमहाद्वीप में प्रचलित एक कविता का रूप हैं जिसमें हिन्दी-उर्दू भाषाओँ में कविताएँ लिखी जाती हैं। [1]

कुछ प्रसिद्ध शायरसंपादित करें

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें

  • Culture of Hindi, Malik Mohammad, Kalinga Publications, 2005, ISBN 978-81-87644-73-6