कीटोएसिडता, कीटोन अम्लमयता या कीटोएसीडोसिस (Ketoacidosis) उस स्थिति को कहते हैं जिसमें शरीर में कीटोन की मात्रा बहुत अधिक बढ़ जाती है। मानव शरीर में बनने वाले दो प्रमुख कीटोन हैं - एसिटोएसिटिक अम्ल तथा बीटा-हाइड्रॉक्सीब्यूटीरेट। इनका निर्माण वसा अम्लों के टूटने से एवं अमिनो अम्लों के विऐमीनन (deamination) से होता है।

उच्च डायबेटिक कीटोएसीडोसिस में रक्त के अंदर अम्ल बनने लगता है। लम्बे समय तक मधुमेह होने के कारण यह होता है। यह जानलेवा हो सकती है, लेकिन डाक्टरो की सलाह से इसका इलाज हो सकता है।

कारणसंपादित करें

कीटोएसिडता के तीन मुख्य कारण हैं- अल्कोहल का सेवन, उपवास, तथा मधुमेह। इनके कारण तीन तरह की किटोएसिडता उत्पन्न होती है।-

  1. मद्यजन्य कीटोएसिडता (alcoholic ketoacidosis)
  2. उपवास कीटोएसिडता (starvation ketoacidosis)
  3. मधुमेह कीटोएसिडता (diabetic ketoacidosis)

कुप्रभावसंपादित करें

मधुमेह के दौरान जब शरीर में इंसुलिन खत्म हो जाता है और शरीर में रक्त कोशिकाएँ शर्करा का उपयोग बंद कर देती हैे, ऐसी स्थिति में शरीर वसा (fat) का इस्तेमाल शुरू कर देता है। वसा के जलने के दौरान एसिड बनता है, जिसे कीटोनस कहते है। जब यह लम्बे समय खून में मिश्रित हो जाता है तो पहले आदमी कोमा में चला जाता है और उसके बाद उसकी मृत्यु भी हो जाती है।

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें