क़ॉसर एल्नील मार्ग, जिसे क़ॉसर अल-नील भी लिखा जाता है, मिस्र की राजधानी काहिरा के काहिरा नगर क्षेत्र में स्थित एक प्रसिद्ध मार्ग व पर्यटन स्थल है। क़ॉसर एल्नील मार्ग काहिरा शहर क्षेत्र का एक बहुत बड़ा मार्ग है। यहाँ पर बहुत सारे व्यापारिक प्रतिष्ठान, व्यवसाय, होटल, रेस्तरां व लगातार चलने वाला रात में मनोरंजन (nightlife) उपलब्ध हैं।

दीप स्तम्भ
क़ॉसर एल्नील मार्ग पर स्थित लगभग सन १९०० का एतिहासिक बोज़ोर कला, लालटेन और दीप स्तम्भ

यहाँ पर अतीत के नगर नियोजन द्वारा निर्मित स्मारक, भवन और वास्तुकला १९वीं सदी के यूरोप की विख्यात ललित कला बोज़ोर कलामिस्र की वास्तुकला - इस्लामी वास्तुकलामूरिश वास्तुकला का पुनर्जागरण जैसी विभिन्न कलाओं की याद दिलाता है।[1] मार्ग और उसके नए भवनों की बनावट एक नए अंतर्राष्ट्रीय स्तर का शहरी जनपद बनाने की कवायद का हिस्सा है जिसका उद्देस्य तमाम नई विदेशी उपक्रमों को मिस्र की समृद्ध एतिहासिक इस्लामी धरोहर से जोड़ना है।

क़ॉसर एल्नील मार्ग पूर्व से पश्चिम की ओर कुछ इस तरह जाती है..
अब्दिन चौक पर स्थित अब्दिन महल से शुरु होकर, एक आकर्षक व्यवसायिक जिले से होते हुए, बाब एल-लौक बाज़ार, और काहिरा शहर क्षेत्र में स्थित अमेरिकी विश्वविद्दालय के परिसर से होते हुए तलात हर्ब मार्ग से जुड़ती है और मोग्गमा भवन और मिस्र का संग्रहालय होते हुए तहरीर चौक पर जाती है। फिर यह नील नदी को पार करती है और अंत मे जेज़ीरा द्वीप पर खत्म हो जाती है।

ईस्माइल पाशा और ईस्माइलिया काल

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अब्दिन महल और उद्दान, कॉसर एल्नील मार्ग के पूर्वी छोर के उपर (लगभग सन 1900)।

मिस्र के शाषक ईस्माइल पाशा ने रणनीतिक सूझबूझ के साथ जज़ीरा द्वीप के सामने नील नदी के पूर्वी किनारों को दोबारा पाने और नील नदी पर पेरिस बनाने का फैसला लिया। नदी का निचला क्षेत्र जो उसके तालाबों, दलदल, गीली मिट्टी और लाखों लोगों के निवास वाले प्राकृतिक जलधारा के तटीय क्षेत्र ने इसे बहुत ही उम्मीदों वाली फलदायी नागरिक अभियांत्रिकी परियोजना बना दिया। उस समय तहरीर चौक पर मौजूद १८६० मे निर्मित खैरी पाशा महल बाद में अमेरिकी विश्वविद्दालय (काहिरा) के परिसर में आ गया। इस परियोजना की शुरुवात मिस्र के सैनिकों के लिए बैरक बनाने से हुई। बाद में यह महत्वपूर्ण मिस्री और उसके बाद महत्वपूर्ण ब्रिटिश संस्थान हो गया।[2] यह क्षेत्र नागरिक ज़िले ईस्माइलिया का हिस्सा था और इस नई परियोजना के लिए जिसके केन्द्र में कॉसर एल्नील मार्ग स्थित था 617 एकड़ (2.50 कि॰मी2) का क्षेत्र स्वीकृत हुआ था। १८७४ में जब काफी हद तक ढाँचागत निर्माण पूरा हो गया तब ईस्माइल पाशा ने भवनों के रख रखाव, साज सज्जा व निर्माण आदि के लिए बहुत बडी राशि खर्च करने की शर्त रखी जिससे यहाँ सिर्फ विशिष्ट, धनवान और प्रभावशाली व्यक्ति ही रह सकते थे।[2] इसकी वजह से शुरुवाती वर्षों में इसने बहुत सारे धनाढ्यों को आकर्शित किया। इसकी वजह से यह क्षेत्र बहुत महत्वपूर्ण हुआ, इसका और आसपास के क्षेत्रों का तेजी से विकास हुआ और यहाँ व्यवसायिक गतिविधियाँ बढ गई।[2]

अंग्रेज़ी व स्वाधीनता काल

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अंग्रेज़ जब १८८२ में मिस्र का निरीक्षण करने आए तो उनका पहला मकसद नील नदी के किनारे बने मिस्री सेना के बैरकों को हथियाना था। अंग्रेज़ों के हाथ में रहने के बहुत वर्षों बाद, राजा फारूक ने वो बैरक १९४८ में वापस हथिया लिए। इसके बाद उन्होने इन बैरकों को अब्बासिया ज़िले के पूर्व में स्थानांनतरित कर दिया। इसके बाद इन बैरकों को काहिरा की नगरपालिका के भवन के रूप में इस्तेमाल किया गया। जिसकी वजह से कॉसर एल्नील मार्ग सैन्य गतिविधियों के केन्द्र से बदलकर नागरिक गतिविधियों वाला महत्वपूर्ण क्षेत्र बन गया।[2] साथ में लगते हुए मिदन ईस्माइलिया चौराहे को अंग्रेज़ी बैराकों को ध्वस्त कर के और विस्तार दे दिया गया। बाद में इसे तहरीर चौक के नाम से जाना जाने लगा।

वास्तुकला

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पूर्वी कॉसर एल्नील मार्ग पर स्थित बोज़ोर वास्तुकला की शैली में निर्मित सेदनवी डिपार्टमेंटल स्टोर
 
मध्य कॉसर एल्नील मार्ग पर स्थित मूरिश वास्तुकला की शैली में बना शाही वाहन सभागार।
 
क़ॉसर अल-नील पुल पर स्थित शेरों के पुतलों की तरफ जाता हुआ कॉसर एल्नील मार्ग, चित्र लगभग 1930 में
 
नील नदी के उपर क़ॉसर अल-नील पुल से जाता हुआ कॉसर एल्नील मार्ग
 
कॉसर एल्नील मार्ग के पश्चिमी छोर पर स्थित मिस्र का आधुनिक कला संग्रहालय
 
२०११ में हुई मिस्र की क्रान्ति के समय का तहरीर चौक पर कॉसर एल्नील मार्ग और तलात हर्ब मार्ग का मिलन केन्द्र।

कॉसर एल्नील मार्ग की वास्तविक वास्तुकला यूरोप के बोज़ोर वास्तुकला, बारोक़ वास्तुकला, नोवियु कला की याद दिलाती है। इस पर आधुनिक वास्तुकला और डेको कला के साथ-साथ मिस्र की वास्तुकला, मिस्री चित्रलिपि, इस्लामी और मूरिश पुनर्जागरण शैलियों का भी प्रभाव है। [1]

ऐतिहासिक स्थल

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पूर्व से पश्चिम की तरफ कुछ महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल हैं -->

  1. ""द आर्किटेक्चरल एंड अर्बन हेरिटेज"". सेंटर फॉर डॉक्युमेंटेशन ऑफ कल्चरल & नैचुरल हेरिटेज (CultNat.org). मूल से 13 अप्रैल 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि ८ अप्रैल,२०१५. Italic or bold markup not allowed in: |publisher= (मदद); |accessdate= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद)
  2. अबु गलील, हम्दी। कायरो स्ट्रीट्स & स्टोरीज़। द एज़िप्सियन पब्लिक बुक एसोसिएसन, कायरो: 2007।

इन्हें भी देखें

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तहरीर चौक
तलात हर्ब मार्ग
मिस्र के पिरामिड
काहिरा
नील नदी
क़ॉसर अल-नील पुल