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रावलपिंडी बम धमाकासंपादित करें

पाकिस्तान के रावलपिंडी में सोमवार, १६ मार्च, २००९ एक बस डिपो में हुए विस्फोट में कम से कम आठ लोग मारे गए हैं और कई अन्य घायल हुए हैं। पुलिस ने इलाक़ा सील कर दिया है।[1]रावलपिंडी के पुलिस प्रमुख नासिर ख़ान दुर्रानी ने बीबीसी को बताया कि विस्फोट में लगभग 15 लोग घायल भी हुए हैं।

एक व्यक्ति शहर के मुख्य बस डिपो में अपने वैन से उतरा और उसके थोड़ी ही देर बाद भीषण विस्फोट हुआ। धमाका पीरवधाई डिपो में हुआ। संवाददाताओं के मुताबिक डिपो एक बड़े बाज़ार के नज़दीक है और यहाँ काफ़ी भीड़ रहती है।

बचाव दलसंपादित करें

राहत और बचाव दल मौके पर पहुँच गया है। घायलों को अस्पताल पहुँचाया जा रहा है। पाकिस्तान में इस तरह विस्फोटों के लिए उन चरमपंथियों को ज़िम्मेदार ठहराया जाता रहा है जो अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका को मदद पहुँचाने का विरोध करते हैं। दुर्रानी ने कहा कि यह आत्मघाती कार बम हमला लगता है। विस्फोट में कई कारें क्षतिग्रस्त हो गईं और आस-पास की दुकानों को भी नुकसान पहुँचा है।

उद्देश्यसंपादित करें

ये धमाका पाकिस्तान में बर्ख़ास्त किए गए जजों को बहाल करने के फ़ैसले और इसके बाद विपक्ष की रैली ख़त्म होने के दिन ही हुई है। पुलिस ने मामले की जाँच पड़ताल शुरु कर दी है।

प्रभावसंपादित करें

इसी दिन नवाज शरीफ के नेतृत्‍व में एक बड़ी रैली इस्‍लामाबाद पहुंचने वाली थी जिसमें राष्‍ट्रपति जरदारी का विरोध किया जा रहा था और उनसे बर्खास्‍त जजों की तुरंत बहाली करने को भी कहा जा रहा था।[2]

पाकिस्‍तान की सरकार ने नवाज शरीफ की मांगों को मान लिया था जिसकी वजह से रैली को इस्‍लामाबाद पहुंचने की जरूरत ही नहीं पड़ी. ऐसी आशंका भी जताई जा रही है कि यह धमाका रैली में आए लोगों को निशाना बनाने के लिए किया गया हो।

ड्रोन हमलासंपादित करें

अमरीकी सेना ने शुक्रवार, 13 मार्च, 2009 को अफ़ग़ानिस्तान सीमा से सटे पाकिस्तान के कुर्रम एजेंसी में पायलटरहित विमान (ड्रोन) से हमले किए हैं जिनमें मरने वालों की संख्या बढ़कर 24 हो गई है। हमले में कई लोग घायल भी हुए हैं।[3]

तालेबान चरमपंथियों ने पूरे इलाक़े को सील कर दिया है और वे मलबे से शव निकाल रहे हैं। गुरुवार की रात मध्य कुर्रम में बरजू के इलाक़े में तालेबान के एक कथित प्रशिक्षण शिविर पर चार मिसाइल दाग़े गए थे। तालेबान सूत्रों के अनुसार हमले में जिस मकान को निशाना बनाया गया है वहाँ उस समय लगभग 58 लोग मौजूद थे और हमले के बाद आग ने सारे कैंप को अपनी लपेट में ले लिया और तालेबान को आशंका है कि वहाँ मौजूद ज़्यादातर लोग मारे जा चुके होंगे।

पिछले महीने भी कुर्रम एजेंसी में ड्रोन हमले किए हुए थे। जिसमें अफ़ग़ान तालेबान के एक प्रशिक्षण शिविर को निशाना बनाया गया था। मुताबिक़ अमरीका इस साल जनवारी में बराक ओबामा के राष्ट्रपति बनने के बाद पाकिस्तानी इलाक़े में यह पाँचवाँ ड्रोन हमला है। इस क्षेत्र में इस तरह की मारक प्रणाली इस्तेमाल करने की क्षमता अमरीकी सेना के पास है।

पिछले कुछ महीनों में उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान में इस तरह के कम से कम 21 हमले किए जा चुके हैं। अफ़ग़ान सीमा को लेकर अमरीका और पाकिस्तान में गहरे मतभेद हैं। चरमपंथियों से निपटने के तरीक़े को लेकर अमरीका पाकिस्तान से नाखुश हैं जबकि इस्लामाबाद अमरीकी हमलों की निंदा करता रहा है।

खैबर मस्जिद बम धमाकासंपादित करें

पाकिस्तान के क़बायली इलाक़े ख़ैबर एजेंसी में शुक्रवार, 27 मार्च, 2009 को एक मस्जिद पर हुए आत्मघाती हमले में 50 से अधिक लोग मारे गए थे। ये हमला जुमे की नमाज़ के वक़्त हुआ था। हमला ख़ैबर एजेंसी में जमरूद तहसील से लगभग पांच किलोमीटर दूर बगयाड़ी में हुआ था। हमले में 70 से अधिक लोगों के घायल होने की ख़बर है। हताहतों में मस्जिद के पास की एक सुरक्षा चौकी पर तैनात पुलिसकर्मी भी शामिल थे।

आत्मघाती हमला इतना भीष्ण था कि पूरी मस्जिद ध्वस्त हो गई। हमलावर ने मस्जिद में नमाज़ियों के बीच अपने आप को धमाके से उड़ा दिया। आत्मघाती हमलावर पहले ही से मस्जिद में मौजूद थे।[4]

भारी मात्रा में विस्‍फोटक से भरा एक वाहन मस्जिद से जा टकराया और उसके बाद एक जोरदार धमाका हुआ। जिस समय यह विस्‍फोट हुआ उस समय मस्जिद में करीब 250 से 300 लोग वहां मौजूद थें.इस हमले में करीब 100 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है।[5] ये मस्जिद दो मंजिला थी। हमले के वक्त लोग जुम्मे की नमाज अदा कर रहे थे।

पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी और राष्‍ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कड़ी निंदा की है। इस विस्‍फोट के बाद पेशावर के सभी अस्‍पतालों में इमरजेंसी की घोषणा कर दी गई थी।

लाहौर धमाकासंपादित करें

लाहौर में बुधवार २७ मई को पुलिस मुख्यालय के निकट किए गए आत्मघाती कार बम हमले में ३० लोग मारे गए हैं और दो सौ घायल हुए हैं।[6] सुबह भारतीय समयानुसार लगभग नौ बजे विस्फोटकों से लदी कार में भीषण धमाका हुआ। इस गाड़ी ने सड़क पर लगे बैरियर तोड़ दिया और आगे बढ़ गई। इसी दौरान उसमें धमाका हुआ। आतंकी टोयोटा कार में सवार थे, किंतु उनकी सही संख्या की पुष्टि नहीं हो सकी है। उनमें से दो ने गाड़ी से नीचे उतर कर सुरक्षा गार्डों पर गोलियाँ चलाई और कारचालक आगे बढ़ा। उसी समय कार में भीषण धमाका हुआ। इसमें में पुलिस का राहत और बचाव मुख्यालय और ख़ुफ़िया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) का भवन पूरी तरह ध्वस्त हो गया। राहत और बचाव कार्य तेज़ करने के लिए सेना की सहायता ली गई। घायलों को पास के गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया।

तालिबान के नेता बैतुल्ला महसूद के एक सहयोगी ने बीबीसी को टेलीफ़ोन पर बताया कि स्वात घाटी में पाकिस्तानी सेना के जारी अभियान के जवाब में ये कार्रवाई की गई। उन्होंने इस तरह के और हमले करने की चेतावनी दी और कहा, "इस्लामाबाद, रावलपिंडी, लाहौर और मुल्तान से लोगों को निकल जाना चाहिए।[7]

पेशावर धमाकेसंपादित करें

गुरुवार २८ मई को फिर से पेशावर शहर में तीन धमाके हुए। पहले दो धमाके पेशावर के बाज़ार वाले व्यस्त इलाक़ों में हुए हैं।[8] इन धमाकों के कुछ ही देर बाद शहर के बाहरी हिस्से में एक चेकपोस्ट को निशाना बनाकर आत्मघाती हमला हुआ जिसमें चार सैनिक मारे गए। पेशावर में हुए हमलों से एक दिन पहले यानी बुधवार को लाहौर में भीषण धमाके हुए जिसमें कम से कम 26 लोग मारे गए और दो सौ से ज़्यादा घायल हुए थे। पाकिस्तान में अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि गुरुवार को लाहौर शहर में तीन धमाके हुए हैं, जिनमें चार सैनिकों समेत कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई है।

मिसाइल हमलासंपादित करें

२३ जून, बुधवार को पाकिस्तानी में तालिबान नेता बैतुल्ला महसूद के शहर दक्षिणी वज़ीरिस्तान में हुए अमरीकी मिसाइल हमले में कम से कम 40 लोग मारे गए।[9][10]

सन्दर्भसंपादित करें