गिरि ब्राह्मण उच्च ब्राह्मणों की एक प्रमुख उपजाति हैं।[1] इस जाति के लोग ज्यादातर उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान

और बिहार में पाए जाते है


गिरि ब्राह्मण गोस्वामी ब्राह्मणों की दस शाखा गिरि, पुरी, वन, भारती, पर्वत, सागर, अरण्य, तीर्थ, सरस्वती, आश्रम मे से एक हैं इसलिए इन्हे दसनामी ब्राह्मण या शैव ब्राह्मण भी कहा जाता है,

शैव मत के अनुयायी होते हैं दसनामी गोस्वामी ब्राह्मण इन्हे शैव ब्राह्मण भी कहा जाता है,

मृत्यु उपरांत दाह संस्कार कि जाती हैं(और समाधि भी दी)जाती है इसलिए दसनामी गोस्वामी ब्राह्मण अन्य ब्राह्मणों से अलग होते हैं इनकी उत्पत्ति भगवान शंकर से मानी जाती है आदि गुरू शंकराचार्य जी द्वारा स्थापित दशनाम परम्परा में उपनाम "गिरि" का गौत्र भृगु है,


सन्दर्भसंपादित करें

ने

गिरि शब्द का प्रयोग करने वाले ब्राहम्ण होते हैं