घूमर लोकनाच

घूमर राजस्थान का एक परंपरागत लोकनृत्य है। इसका विकास भील जनजाति ने किया था और बाद में बाकी राजस्थानी बिरादरियों ने इसे अपना लिया। भील जनजाति मां सरस्वती की आराधना के लिए घूमर किया करते थे। यह नाच ज्यादातर औरतें घूंघट लगाकर और एक घुमेरदार पोशाक जिसे "घाघरा" कहते हैं, पहन कर करती हैं।[1]

घूमर गीतसंपादित करें

 
राजपूत महिला द्वारा घूमर नाच

सामान्यतः निम्न गीतों पर घूमर नृत्य किया जाता है।

  • "म्हारी घूमर"
  • "चिरमी म्हारी चिरमली"
  • "आवे हिचकी" - पारम्परिक राजस्थानी घूमर गीत
  • "घूमर"
  • "जंवाई जी पावणा"
  • "तारां री चुंदड़ी"
  • "म्हारो गोरबन्द नखतरालो"
  • "म्हारी घूमर"
  • "घूमर रे घूमर रे"
  • "घूमर" - 2018 की फिल्म पद्मावत से

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "Ghoomar Dance, Rajasthan".

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