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भील मध्य भारत की एक जनजाति है। भील जनजाति के लोग भील भाषा बोलते है। भील जाति मे कई वीर योद्धाओं का जन्म हुआ।। महावीर स्वामी पहले पुरूरवा भील के अवतार मे थे और उन्होंने शराब, माँस और मधु के सेवन नहीं करने की शिक्षा दी। हर व्यक्ति को शिक्षा का महत्त्व समझना चाहिए और अपने बच्चों को शिक्षा का अनमोल खजाना देना चाहिए। भील, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और राजस्थान में एक अनुसूचित जनजाति है, अजमेर में ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह के खादिम भी भील पूर्वजों के वंशज हैं। भील त्रिपुरा और पाकिस्तान के सिन्ध के थारपरकअर जिले में भी बसे हुये हैं। राजस्थान में भील ज्यादातर निवास करते हैं यह लोग यहां पर शौर्य के प्रतीक जो अपने बलिदान देने में पीछे नहीं हटते है। यहां पर राणा पूंजा भील जी को याद किया जाता है जिन्होंने महाराणा प्रताप के साथ मिलकर मुगलों के छक्के छुड़ा दिए । यहां पर भील आदिवासी लोग तीर कमान -से ही बात करते हैं । यहां बहुत शक्तिशाली जंगल में कंद मूल खा कर रहने वाले लोग होते हैं। इनके अपने रीति रिवाज परंपराएं संस्कृति होती है यह प्रकृति पूजक होते हैं प्रकृति की पूजा करते हैं। एक शोध के मुताबिक भील कभी भीख नहीं मांगते है।

भील
Young Indian girl, Raisen district, Madhya Pradesh.jpg
कुल जनसंख्या
ख़ास आवास क्षेत्र
Flag of India.svg भारत
              गुजरात 3,441,945[1]
              मध्य प्रदेश 4,619,068[2]
              महाराष्ट्र 1,818,792[3]
              राजस्थान 2,805,948[4]
भाषाएँ
भील भाषा
अन्य सम्बंधित समूह

अनुक्रम

भील इतिहाससंपादित करें

भीलों का अपना एक लंबा इतिहास रहा है, कुछ इतिहासकारो ने भीलों को द्रविड़ो से पहले का भारतीय निवासी माना तो कुछ ने भीलों को द्रविड़ ही माना है। भीलराजा का वर्णन इडर से मिलता हे जहां राजा मांडलिक का शासन रहा । राजा मांडलिक ने ही गुहिल वंश अथवा मेवाड़ के प्रथम संस्थापक गुहादित्य को अपने इडर राज्य मे रखकर संरक्षण किया । गुहादित्य राजा मांडलिक के राजमहल मे रहता और भील बालको के साथ घुड़सवारी करता , राजा मांडलिक ने गुहादित्य को कुछ जमीन और जंगल दिए , आगे चलकर वही बालक गुहादित्य इडर साम्राज्य का राजा बना । गुहिलवंश की चौथी पीढ़ी के शासक नागादित्य का व्यवहार भील समुदाय के साथ अच्छा नहीं था इसी कारण भीलों और नागादित्य के बीच युद्ध हुआ और भीलों ने इडर पर पुनः अपना अधिकार कर लिया । बप्पा रावल का लालन - पालन भील समुदाय ने किया और बप्पा को रावल की उपाधि भील समुदाय ने ही दी थी । बप्पारावल ने भीलों के साथ मिलकर अरबो से युद्ध किया ।

बाबर और अकबर के खिलाफ मेवाड़ राजपूतो के साथ कंधे से कंधा मिलाकर युद्ध करने वाले भील ही थे । राणा पूंजा भील और महाराणा प्रताप की आपसी युद्ध नीती से ही मेवाड़, मुगलो से सुरक्षित रहा। हल्दीघाटी का युद्ध मे राणापूंजा जी और उनकी भील सेना का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इसी कारण मेवाड चिन्ह मे एक तरफ महाराणा प्रताप जी और एक तरफ राणापूंजा भील जी अर्थात राजपूत और भील का प्रतिकचिन्ह अस्तित्व मे आया। मुगलों के बाद जब मराठो ने मेवाड़ पर आक्रमण किया तब भी भील मेवाड़ के साथ खड़े रहे । भील , मराठा शासक वीर शिवाजी के साथ खड़े रहें। भील और राजपूतो मे खान-पान होता रहा ।

गुजरात के डांग जिले के पांच भील राजाओं ने मिलकर अंग्रेज़ो से युद्ध किया , लश्करिया अंबा में सबसे बड़ा युद्ध हुए, इस युद्ध को डांग का सबसे बड़ा युद्ध कहा जाता है । डांग के यह पांच भील राजा भारत के एकमात्र वंशानुगत राजा है और इन्हें भारत सरकार की तरफ से पेंशन मिलती हैं , आजादी के पहले ब्रिटिश सरकार इन राजाओं को धन देती थी ।

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भील आंदोलनसंपादित करें

भील एक स्वतंत्रताप्रिय जाति है ।

प्रमुख भील आंदोलन

आंदोलन। नेता। समय

भील विद्रोह सेवाराम 1825-1831


मेवाड़भीलआंदोलनमोतीलाल तेजावत1922

निवास क्षेत्रसंपादित करें

भील शब्द की उत्पत्ति "वील" से हुई है जिसका द्रविड़ भाषा में अर्थ होता हैं "धनुष"। भील जाति दो प्रकार से विभाजित है- 1.उजलिया/क्षत्रिय भील- उजलिया भील मूल रूप से वे क्षत्रिय है जो सामाजिक/मुगल आक्रमण के समय जंगलो में चले गए एवं मूल भीलों से वैवाहिक संबंध स्थापित कर लेने से स्वयं को उजलिया भील कहने लगे मालवा में रहने वाले भील वही है। इनके रिति रिवाज राजपूतों की तरह ही है। इनमें वधूमूल्य नहीं पाया जाता और ना ही ये भीली भाषा बोलते है। इनके चेहरे और शरीर की बनाबट, कद काठी प्राचीन राजपूतों से मिलती है। 2.लंगोट भील-ये वनों में रहने वाले मूल भील है इनके रीति रिवाज आज भी पुराने है। इनमें वधूमूल्य का प्रचलन पाया जाता है। म.प्र. के निमाड में रहने वाले अधिकांश जनजाति यही है स्वभाव से भोले होते हैं, बदले की भावना में आक्रामक भी होते हैं यह मध्यप्रदेश के झाबुआ,अलिराजपुर, धार,पेटलावाद, छेत्रो में निवास करतें है भील अपने पूर्वजों को पूजते है और मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के राणापुर के पास बाबा देव को पूजते है!

भील शासको/भील समुदाय के आधार पर भीलवाड़ा, डूंगरपुर, बांसवाडा , कुशलगढ़, आशावल ( अहमदाबाद),मनोहरथाना,भिलाई और भीनमाल स्थानो का नामकरण हुआ।

उप-विभागसंपादित करें

भील कई प्रकार के कुख्यात क्षेत्रीय विभाजनों में विभाजित हैं, जिनमें कई कुलों और वंशों की संख्या है। गुजरात में मुख्य विभाग बरदा , भील गरासिया , ढोली भील , डुंगरी भील , डुंगरी गरासिया , भील ​​पटेलिया, रावल भील , तड़वी भील , भागलिया , भिलाला , पावरा, वासरी या वासेव , डूंगरी गरासिया , और वसावा , महाराष्ट्र में हैं । भील मावची और कोतवाल उनके मुख्य उप-समूह हैं। राजस्थान में , वे भील गरासिया , धोली भील , डुंगरी भील , डुंगरी गरासिया , मेवासी भील , रावल भील , तडवी भील , भागलिया , भिलाला , पावरा, वासव और वासेव के रूप में मौजूद हैं ।[6]

संस्कृतिसंपादित करें

भीलों के पास समृद्ध और अनोखी संस्कृति है। भिलाला उप-मंडल अपनी पिथौरा पेंटिंग के लिए जाना जाता है।[7] घूमर भील जनजाति का पारंपरिक लोक नृत्य है।[8][9] घूमर नारीत्व का प्रतीक है। युवा लड़कियां इस नृत्य में भाग लेती हैं और घोषणा करती हैं कि वे महिलाओं के जूते में कदम रख रही हैं।

कलासंपादित करें

भील पेंटिंग को भरने के रूप में बहु-रंगीन डॉट्स के उपयोग की विशेषता है। भूरी बाई पहली भील कलाकार थीं, जिन्होंने रेडीमेड रंगों और कागजों का उपयोग किया था। अन्य ज्ञात भील कलाकारों में लाडो बाई , शेर सिंह, राम सिंह और डब्बू बारिया शामिल हैं।[10]

भोजनसंपादित करें

भीलों के मुख्य खाद्य पदार्थ मक्का , प्याज , लहसुन और मिर्च हैं जो वे अपने छोटे खेतों में खेती करते हैं। वे स्थानीय जंगलों से फल और सब्जियां एकत्र करते हैं। त्योहारों और अन्य विशेष अवसरों पर ही गेहूं और चावल का उपयोग किया जाता है। वे स्व-निर्मित धनुष और तीर, तलवार, चाकू, कुल्हाड़ी इत्यादि अपने साथ आत्मरक्षा के लिए हथियार के रूप में रखते हैं और जंगली जीवों का शिकार करते हैं जो उनके आहार का प्रमुख हिस्सा है। वे महुआ ( मधुका लोंगिफोलिया ) के फूल से उनके द्वारा आसुत शराब का उपयोग करते हैं। त्यौहारों के अवसर पर पकवानों से भरपूर विभिन्न प्रकार की चीजें तैयार की जाती हैं, यानी मक्का, गेहूं, जौ, माल्ट और चावल। भील पारंपरिक रूप से मांसाहारी हैं।[11]

आस्था और उपासनासंपादित करें

प्रत्येक गाँव का अपना स्थानीय देवता ( ग्रामदेव ) होता है और परिवारों के पास भी उनके जतीदेव, कुलदेव और कुलदेवी (घर में रहने वाले देवता) होते हैं जो कि पत्थरों के प्रतीक हैं। 'भाटी देव' और 'भीलट देव' उनके नाग-देवता हैं। 'बाबा देव' उनके ग्राम देवता हैं। करकुलिया देव उनके फसल देवता हैं, गोपाल देव उनके देहाती देवता हैं, बाग देव उनके शेर भगवान हैं, भैरव देव उनके कुत्ते भगवान हैं। उनके कुछ अन्य देवता हैं इंद्र देव, बड़ा देव, महादेव, तेजाजी, लोथा माई, टेकमा, ओर्का चिचमा और काजल देव।

उन्हें अपने शारीरिक, मानसिक और मनोवैज्ञानिक उपचारों के लिए अंधविश्वासों और भोपों पर अत्यधिक विश्वास है।[11]

त्यौहारसंपादित करें

कई त्यौहार हैं, अर्थात। भीलों द्वारा मनाई जाने वाली राखी , नवरात्रि , दशहरा , दिवाली , होली । वे कुछ पारंपरिक त्योहार भी मनाते हैं। अखातीज, नवमी, हवन माता की चालवानी, सावन माता का जतरा, दीवासा, नवाई, भगोरिया, गल, गर, धोबी, संजा, इंदल, दोहा आदि जोशीले उत्साह और नैतिकता के साथ।

कुछ त्योहारों के दौरान जिलों के विभिन्न स्थानों पर कई आदिवासी मेले लगते हैं। नवरात्रि मेला, भगोरिया मेला (होली के त्योहार के दौरान) आदि।[11]

नृत्य और उत्सवसंपादित करें

उनके मनोरंजन का मुख्य साधन लोक गीत और नृत्य हैं। महिलाएं जन्म उत्सव पर नृत्य करती हैं, पारंपरिक भोली शैली में कुछ उत्सवों पर ढोल की थाप के साथ विवाह समारोह करती हैं। उनके नृत्यों में लाठी (कर्मचारी) नृत्य, ढोल नृत्य, विवाह नृत्य, होली नृत्य, युद्ध नृत्य, भगोरिया नृत्य, दीपावली नृत्य और शिकार नृत्य शामिल हैं। वाद्ययंत्रों में हारमोनियम , सारंगी , कुंडी, बाँसुरी , अपांग, खजरिया, तबला , जे हंझ , मंडल और थाली शामिल हैं। वे आम तौर पर स्थानीय उत्पादों से बने होते हैं।[11]

उल्लेखनीय लोगसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "Gujarat: Data Highlights the Scheduled Tribes" (PDF). Census of India 2001. Census Commission of India. अभिगमन तिथि 2008-03-31.
  2. "Madhya Pradesh: Data Highlights the Scheduled Tribes" (PDF). Census of India 2001. Census Commission of India. अभिगमन तिथि 2008-03-06.
  3. "Maharashtra: Data Highlights the Scheduled Tribes" (PDF). Census of India 2001. Census Commission of India. अभिगमन तिथि 2008-03-31.
  4. "Rajasthan: Data Highlights the Scheduled Tribes" (PDF). Census of India 2001. Census Commission of India. अभिगमन तिथि 2008-03-31.
  5. {{cite shodhganga.inflibnet.ac.in › ...PDF Web results Chapter-3.p65 - Shodhganga}}
  6. "List of Scheduled Tribes". Census of India: Government of India. 7 March 2007. मूल से 5 June 2010 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 27 November 2012.
  7. Pachauri, Swasti (26 June 2014). "Pithora art depicts different hues of tribal life". Indian Express. अभिगमन तिथि 13 February 2015.
  8. Kumar, Ashok Kiran (2014). Inquisitive Social Sciences. Republic of India: S. Chand Publishing. पृ॰ 93. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9789352831098.
  9. Danver, Steven L. (June 28, 2014). Native People of The World. United States of America: Routledge. पृ॰ 522. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 076568294X.
  10. "Bhil Art - How A Tribe Uses Dots To Make Their Story Come Alive". Artisera. अभिगमन तिथि 2019-03-18.
  11. https://books.google.co.in/books?id=UjhLDwAAQBAJ&pg=PA4&lpg=PA4&dq=Bhil+people+history&source=bl&ots=NtaP_L1LtV&sig=msu_cEDmYMf0dgeC7_pHzLNgxkg&hl=en&sa=X&ved=2ahUKEwjN6uvl94LeAhVWWX0KHWMgCRA4RhDoATACegQIChAB#v=onepage&q=Bhil%20people%20history&f=false