चोलिस्तान, जिसे स्थानीय भाषा में रोही भी कहते हैं, पाकिस्तानी पंजाब और भारत व सिंध के कुछ पड़ोसी भागों में फैला हुआ एक रेगिस्तान व अर्ध-रेगिस्तानी क्षेत्र है। यह थर रेगिस्तान से जुड़ा हुआ है। यहाँ हकरा नदी का सुखा हुआ प्राचीन मार्ग है जिसके किनारे सिन्धु घाटी सभ्यता के बहुत से खंडहर मिलते हैं। ९वीं सदी में राय जज्जा भट्टी द्वारा बनाया गया देरावड़ क़िला भी चोलिस्तान के बहावलपुर क्षेत्र में खड़ा है।[1]

चोलिस्तान का देरावड़ क़िला

नामोत्पत्तिसंपादित करें

'चोल' का अर्थ कई तुर्की भाषाओं में 'मरुभुमि' होता है।

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. Mughal, M.R. 1997. Ancient Cholistan. Lahore: Feroz and Sons.