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इतिहाससंपादित करें

भारत विभाजन से पहले 1941 में बनी जमात-ए-इस्लामी के संस्थापक सैयद अबुल अला मौदूदी थे। विभाजन के बाद यह पाकिस्तान चले गए और फिर पार्टी के पूर्वी धड़े से बांग्लादेश जमात ए-इस्लामी का जन्म हुआ।[1]

राजनीति में स्थानसंपादित करें

जमात-ए-इस्लामी देश की सबसे बड़ी इस्लामी राजनीतिक पार्टी है। 1971 में होने वाली स्वतंत्रता युद्ध में इस दल ने पाकिस्तान का समर्थन किया था। बाद में यह बांग्लादेश के इस्लामिकरन के प्रयास में जुटकर एक सक्रिय दल के रूप में उभरी।[1]


आरोपसंपादित करें

साल 2010 में अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल ने पार्टी के आठ नेताओं को 1971 युद्ध के अपराध का दोषी पाया। भारत में बाबरी मसजिद गिराने के बाद पार्टी के नेताओं और छात्र संगठन पर बांग्लादेश में हिन्दू-विरोधी दंगे भड़काने का भी आरोप है।[1]

पंजीकरण रद्दसंपादित करें

बांग्लादेश की एक अदालत ने जमात-ए-इस्लामी का पंजीकरण रद्द कर दिया, जिससे भविष्य में यह दल चुनावों में हिस्सा नहीं ले सकेगा।[2]

सन्दर्भसंपादित करें