जयन्त आठवले एक धार्मिक गुरू एवं सनातन धर्म के प्रचारक हैं। उनके विश्व भर में अरबों अनुयायी हैं तथा अन्तरराष्ट्रीय स्तर की एक संस्था सनातन संस्था के संस्थापक हैं।[1]

डॉ. आठवले ने हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए सनातन प्रभात नामक नियतकालिकों का प्रकाशन आरम्भ किया है । उनके मार्गदर्शन से अनेक लोग, हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए संगठित होकर कार्य कर रहे हैं। हिन्दुत्ववादी संगठनों को भी उनसे प्रेरणा मिलती है ।

परिचयसंपादित करें

डॉ. जयंत बाळाजी आठवलेजी ने चिकित्साशास्त्र की पढाई पूरी करने के पश्‍चात वर्ष १९७१ से १९७८ तक ब्रिटेन में उच्च शिक्षा प्राप्त कर, सम्मोहन उपचार-पद्धति के विषय में शोध किया । इस शोध में उन्होंने, अनुचित कृत्यों का बोध तथा उनपर नियंत्रण(मनोवैज्ञानिक प्रतिक्रिया पद्धति; साइको-फीडबैक टेक्निक), अनुचित प्रतिक्रियाआें के विरुद्ध उचित प्रतिक्रियाएं उत्पन्न करना (प्रतिक्रिया प्रतिस्थापना पद्धति; रिस्पॉन्स सब्स्टीट्यूशन टेक्निक), घटना का मन में पूर्वाभ्यास करना (सम्मोहक विसुग्राहीकरण पद्धति; हिप्नोटिक डिसेंसिटाइजेशन टेक्नीक); आदि सम्मोहन-उपचार से संबंधित नई पद्धतियों को प्रस्तुत किया ।

अध्यात्म की श्रेष्ठता ज्ञात होने पर उन्होंने अध्यात्मप्रसार के लिए अपने गुरु भक्तराज महाराज के आशीर्वाद से सनातन संस्था की स्थापना की ।

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "स्पेशल रिपोर्ट : जयंत आठवले आणि 'सनातन'चा इतिहास". ABPmajha. मूल से 27 मार्च 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 27 March 2019.

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें