जहाँ आरा (1964 फ़िल्म)

1964 में बनी हिन्दी फ़िल्म

जहाँ आरा 1964 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। इसका निर्देशन विनोद कुमार ने किया और इसमें भारत भूषण, माला सिन्हा, शशिकला और पृथ्वीराज कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं। इसमें मदन मोहन का संगीत और राजेन्द्र कृष्ण के गीत हैं। यह फ़िल्म जहाँ आरा बेगम के जीवन पे आधारित है।

जहाँ आरा

जहाँ आरा का पोस्टर
निर्देशक विनोद कुमार
अभिनेता भारत भूषण,
माला सिन्हा,
शशिकला,
पृथ्वीराज कपूर
संगीतकार मदन मोहन
प्रदर्शन तिथि
1964
देश भारत
भाषा हिन्दी

मिर्जा युसूफ चंगेजी (भारत भूषण) और जहाँ आरा (माला सिन्हा) बचपन से ही अच्छे दोस्त रहे हैं। उनके बड़े होने पे हालत अब वैसे नहीं रहे हैं जैसे पहले थे क्योंकि जहाँ आरा के पिता कोई और नहीं बल्कि बादशाह शाहजहाँ हैं। पुरुषों को किसी भी परिस्थिति में राजकुमारी से मिलने की अनुमति नहीं है। हालांकि, जहाँ आरा और मिर्जा चुपके से मिलते हैं और एक दूसरे से शादी करने का वादा करते हैं। फिर बादशाह की पत्नी, मुमताज महल (अचला सचदेव) का निधन हो जाता है।

बादशाह तबाह हो जाता है और अभी भी अपनी पत्नी की मृत्यु का शोक मनाते हुए, वह उसके नाम पर एक स्मारक बनाने का वचन लेता है (जिसे बाद में ताजमहल कहा जाएगा)। अपनी मृत्यु के करीब होते हुए मुमताज जहाँ आरा से वादा लेती है कि वह अपने पिता की देखभाल करेगी। यह जिम्मेदारी उसे मिर्जा के लिए अपने प्यार का त्याग करने के लिए मजबूर करती है, जिसका दिल टूट जाता है और वह यह विश्वास करना जारी रखता है कि जहाँ आरा कभी ना कभी उसके साथ फिर से मिल जाएगी।

सभी गीत राजेन्द्र कृष्ण द्वारा लिखित; सारा संगीत मदन मोहन द्वारा रचित।

क्र॰शीर्षकगायकअवधि
1."ऐ सनम आज ये क़सम खायें"तलत महमूद, लता मंगेशकर5:30
2."हाल-ए-दिल यूँ उन्हें सुनाया गया"लता मंगेशकर3:02
3."किसी की याद में दुनिया को"मोहम्मद रफ़ी3:30
4."बाद मुद्दत के ये घड़ी आई"मोहम्मद रफ़ी, सुमन कल्याणपुर5:03
5."वो चुप रहें तो मेरे दिल के दाग़"लता मंगेशकर4:42
6."जब जब तुम्हें भुलाया"लता मंगेशकर, आशा भोंसले8:23
7."फिर वही शाम वही ग़म"तलत महमूद3:35
8."तेरी आँख के आँसू पी जाऊँ"तलत महमूद4:11
9."मैं तेरी नज़र का सुरूर हूँ"तलत महमूद3:00

बाहरी कड़ियाँ

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