डैनियल कान्नमैन
डेनियल कन्नमैन (Daniel Kahneman ; ५ मार्च, १९३४ – २७ मार्च, २०२४), प्रसिद्ध इज़राइली-अमेरिकी मनोवैज्ञानिक और नोबेल पुरस्कार विजेता थे। उनके व्यवहारपरक अर्थशास्त्र (Behavioral economics) और संज्ञानात्मक मनोविज्ञान के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम ने मानव निर्णय लेने की समझ में काफी सुधार किया है।
डेनियल कन्नमैन (Daniel Kahneman) | |
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सन २००९ में कान्नमैन् | |
जन्म |
5 मार्च 1934 Tel Aviv, Mandatory Palestine |
मृत्यु |
मार्च 27, 2024 Manhattan, New York, U.S.[1] | (उम्र 90 वर्ष)
राष्ट्रीयता | American, Israeli |
क्षेत्र |
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संस्थान |
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डॉक्टरी सलाहकार | Susan M. Ervin-Tripp |
उल्लेखनीय शिष्य |
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प्रसिद्धि | |
उल्लेखनीय सम्मान |
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डैनियल कान्नमैन के अध्ययन का मूल विषय मनोविज्ञान था, जिसमें वे खूब सम्मानित हुए थे, लेकिन अपने शोध से वे एक अर्थशास्त्र अर्थशास्त्री की भी भूमिका निभाने लगे। वे मनुष्य के सामान्य व्यवहार से इतर यह मानते थे कि पैसे और खर्च के मामले में मानवीय व्यवहार हमेशा तर्कसंगत नहीं रहता, और न ही उसकी सोच उस पर आधारित होती है। वह तर्कों से परे भी सोचता है। इसे व्यवहारपरक अर्थशास्त्र कहते हैं। इस विषय पर कान्नमैन ने अपने सहयोगी एमोस टेवेरस्की के साथ कार्य किया। 1996 में टेवेरस्की के निधन के बाद इस विषय पर कान्नमैन अकेले ही काम करते रहे। इसी विषय पर 2002 में कानमैन को प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार मिला।
जीवनी
संपादित करेंडैनियल कान्नमैन का जन्म तेल अवीव में हुआ था। उन्होंने मनुष्यों के फैसले लेने के मनोविज्ञान पर गहरा अध्ययन किया था। उन्होंने आधुनिक आर्थिक सिद्धान्तों पर मानवीय विवेक की बात को चुनौती दी और इस तरह से व्यवहारपरक अर्थशास्त्र को जन्म दिया। यहूदी होने के कारण अपने प्रारंभिक जीवन में उन्हें बहुत कष्ट उठाना पड़ा। बाद में वे परिवार के साथ पेरिस चले गये थे। नाजियों के शासन काल में वे पेरिस में ही थे। वर्ष 1954 में उन्होंने यरुशलम विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातक की डिग्री ली। उनका मुख्य विषय अर्थशास्त्र था। वर्ष 1958 में वे आगे पढ़ने के लिए अमेरिका चले गये। वहां उन्होंने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में पीएचडी किया। उनका विवाह इराह से हुआ, जिनका 1978 में निधन हो गया। इसके बाद उन्होंने ऐनी ट्रीसमैन से विवाह किया, जो एक अर्थशास्त्री थीं, लेकिन 2018 में उनका भी देहान्त हो गया। कान्नमैन अमेरिका के प्रिंसटन विश्वविद्यालय में 1993 से 2024 तक जुड़े रहे। उनके द्वारा किये गये कार्यों को बीसवीं सदी के विज्ञान की एक शानदार उपलब्धि माना जाता है। उन्होंने अर्थशास्त्र को मनोविज्ञान से जोड़कर उसके बारे में सोचने का तरीका ही बदल दिया। नब्बे वर्ष की आयु में कानमैन का निधन 27 मार्च, 2024 को हो गया।
कानमैन ने जो शोध किया और बताया, वह यह था कि मनुष्य की सोच खर्च के मामले में व्यवहारपरक होती है। इस सिद्धान्त ने काफी हलचल मचायी और परम्परागत अर्थशास्त्र से इतर एक नया अर्थशास्त्र गढ़ दिया जिसे व्यवहारपरक अर्थशास्त्र कहा गया। यह अर्थशास्त्र मनोविज्ञान पर आधारित है और यही मनुष्य के निर्णयों और व्यवहार को नियंत्रित करता है। कान्नमैन ने इसे मनुष्य के दिमाग की गुत्थी बताया और कहा कि घाटा होने पर मनुष्य का व्यवहार बदल जाता है, क्योंकि वह इससे घृणा करता है और उसके अनुसार ही सोच रखता है। उन्होंने बड़ी अच्छी बात बतायी कि 100 डॉलर मिलने पर खुशी तो होती है, लेकिन इतने का नुकसान होने पर दुख उसका दुगना होता है, जबकि यह उसके बराबर ही होना चाहिए। यह एक स्वाभाविक बात है। उन्होंने यह भी बताया कि अपने खरीदे हुए शेयरों के भाव जानने के लिए हमेशा स्टॉक मार्केट में अपने शेयरों की कीमतें नहीं देखते रहना चाहिए। इससे एक अलग तरह की तकलीफ होती है, जिसकी वजह से व्यक्ति बहुत अस्थिर और हताश सा होने लगता है। यह एक सामान्य व्यवहार है।
कानमैन के सिद्धांतों को 2011 में प्रकाशित उनकी पुस्तक 'थिंकिंग फास्ट एंड स्लो' (त्वरित और मन्द चिन्तन) ने स्थापित किया। यह पुस्तक न केवल विद्वानों, बल्कि आम जनता को इतनी पसंद आयी कि अपने समय की सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तक बन गयी। इस पुस्तक में कान्नमैन ने मनुष्य के पूर्वाग्रहों के बारे में विस्तार से चर्चा की है और बताया है कि ये उसके फैसलों में बदलाव ले आते हैं। कान्नमैन के शिष्य और विद्वान शेन फ्रेडरिक, जो अमेरिका के प्रसिद्ध येल स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के प्रोफेसर हैं, उनके सिद्धांतों की प्रशंसा करते हुए कहते हैं कि कानमैन ने अर्थशास्त्र को एक सच्चा व्यवहारपरक विज्ञान बना दिया है। वह अस्थिर धारणाओं के समूह का मात्र गणितीय अभ्यास नहीं रह गया है। यह मानवीय व्यवहार पर पूरी तरह आधारित है। मनुष्य का विवेक, समय और परिस्थितियों के साथ बदल जाता है।